नई दिल्ली
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों पर दो टूक बयान दिया है. जयशंकर के मुताबिक, जब तक भारत की सुरक्षा चिंताओं, खासकर सीमा पार आतंकवाद को लेकर पश्चिमी देशों और सहयोगियों का रुख पूरी तरह साफ नहीं होगा, तब तक द्विपक्षीय रिश्तों पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है.
जयशंकर न्यूयॉर्क स्थित 'एशिया सोसाइटी' में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पहुंचे थे. इस दौरान पूर्व अमेरिकी राजनयिक और एशिया सोसाइटी के फेलो डेनियल रसेल ने भारत-अमेरिका संबंधों और पिछले कुछ महीनों में ट्रेड और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछा.
इस पर जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि अगर कोई देश भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी करना चाहता है, तो उसे भारत की बुनियादी संवेदनशीलता को समझना होगा.
'एक पड़ोसी देश के प्रायोजित आतंकवाद का…'
जयशंकर ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा, 'हमारे लिए जो बात सबसे ज्यादा अहम है, वो आतंकवाद का मुद्दा है. हम दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से हैं, जिन्हें दशकों से एक पड़ोसी देश के प्रायोजित आतंकवाद का सामना करना पड़ा है.'
भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा कि अगर भारत के इस सबसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर उसके साझीदार देशों में पर्याप्त समझ, सराहना या संवेदना नहीं होगी, तो ये स्वाभाविक रूप से आपसी संबंधों पर असर डालेगा.
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से अमेरिका और पाकिस्तान काफी करीब आए हैं. पिछले कुछ समय में अमेरिका के रुख और उसकी पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ बढ़ाई गई मुलाकातों पर भारत ने अपनी पैनी नजर रखी है.
'आपसी तालमेल और समझ बेहतर…'
जयशंकर ने इस दौरान ये भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच के रिश्ते बेहद अहम हैं और वो उम्मीद करते हैं कि ये साझेदारी एक अच्छी दिशा में आगे बढ़ेगी. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि हमें जमीनी सच्चदाइयों और उन मुद्दों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए जिनका हम सामना कर रहे हैं. जब तक इन मुद्दों पर आपसी तालमेल और समझ बेहतर नहीं होगी, तब तक रिश्तों में वो मजबूती नहीं आ सकेगी जिसकी उम्मीद की जाती है.
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