हिंदू धर्म में आश्विन माह का कृष्ण पक्ष हमारे पूर्वजों को समर्पित पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता है. इस दौरान पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य करने की समृद्ध परंपरा है. ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, यह 16 दिनों की अवधि पूर्णतः संयम, सादगी और आत्म-स्मरण का समय होती है. मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान नई या भौतिक सुख-सुविधाओं की खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इस समय अनजाने में खरीदी गई कुछ विशेष वस्तुएं घर में वास्तु दोष और आर्थिक तंगी का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान किन 5 प्रमुख चीजों को घर लाने से बचना चाहिए.
नए कपड़े और सोने-चांदी के गहने (New Clothes and Jewellery)
पितृ पक्ष का समय किसी प्रकार का जश्न या उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि पितरों के प्रति शोक, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का होता है. इस अवधि में स्वयं के उपयोग के लिए नए वस्त्र, सोने-चांदी के आभूषण या फैशनेबल वस्तुएं खरीदने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है. हालांकि, यदि आप पितरों के तर्पण, ब्राह्मणों या गरीबों को दान करने के उद्देश्य से वस्त्र खरीदते हैं, तो वह वर्जित नहीं है.
नया वाहन और प्रॉपर्टी (Vehicle and Property)
नई कार, बाइक, नया घर, दुकान या जमीन की खरीदारी को जीवन में किसी नए व शुभ कार्य की शुरुआत माना जाता है. श्राद्ध पक्ष में नए काम या अचल संपत्ति का सौदा करने से बचना चाहिए. मान्यता है कि इस समय संपत्ति में निवेश करने से उस स्थान या वाहन से पूर्ण शुभ फल प्राप्त नहीं होते हैं.
नई झाड़ू (Broom)
वास्तु और शास्त्रों में झाड़ू का सीधा संबंध धन की देवी मां लक्ष्मी से माना गया है. पितृ पक्ष के दौरान नई झाड़ू खरीदकर घर लाने की सख्त मनाही होती है. ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध के दिनों में झाड़ू की खरीदारी करने से घर की बरकत रुक जाती है और अनचाहे खर्चे बढ़ने लगते हैं.
लोहा और लोहे के सामान (Iron Items)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ कार्य में लोहे के बर्तनों या धातु का प्रयोग और इसकी खरीदारी दोनों ही शुभ नहीं माने जाते है. श्राद्ध पक्ष में लोहा या लोहे से बनी नई वस्तुएं घर लाने से जीवन में मानसिक तनाव और परेशानियां बढ़ सकती हैं.
इलेक्ट्रॉनिक्स और नया फर्नीचर (Electronics and Furniture)
नया टीवी, फ्रिज, सोफा, बेड या घर की सजावट का सामान भौतिक विलासिता (Luxury) को दर्शाता है. चूंकि, यह समय सादगी का है, इसलिए इस दौरान घर के लिए विलासिता से जुड़े उपकरण खरीदना वर्जित माना गया है.
कब मनाई सर्वपितृ अमावस्या?
इस वर्ष पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा. जिन पूर्वजों की मृत्यु की सटीक तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाना अत्यंत फलदायी माना जाता है.
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