मध्य प्रदेश के 8 शहरों का बदलेगा स्वरूप, नए मास्टर प्लान में ‘वॉक टू वर्क’ की सुविधा

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल 

सरकार ने अब बड़े शहरों के मास्टर प्लान जारी करना शुरू कर दिया है। भोपाल के बाद अब इंदौर की तैयारी है। क्योंकि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने भोपाल (Bhopal master plan update) से पहले इंदौर के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार कर लिया था। अब नए मास्टर प्लान में नई टाउनशिप पॉलिसी को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं, प्रदूषण रहित वातावरण, वर्टिकल डेवलपमेंट और उद्योगों को बढ़ावा देने का खास ध्यान रखा गया है। टीएंडसीपी की टीम ने प्लान को अंतिम रूप देने के पहले गुजरात की गिफ्ट सिटी और दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की प्लानिंग का भी जाकर अध्ययन किया था।

टीएंडसीपी अनुसार, प्रदेश के जिन शहरों में आर्थिक गतिविधियां और आबादी बढ़ रही है वहां पर दिल्ली की तर्ज पर ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित किए जाएंगे। इसके साथ वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ाने के लिए असीमित एफएआर, सड़कों की चौड़ाई के आधार पर मिक्स लैंड यूज, ग्रीन टीडीआर, लोकल एरिया प्लानिंग और पार्किंग संबंधी प्रावधान सुनिश्चित किए जा रहे हैं। इंदौर में भी मेट्रोपोलिटन सिटी की अवधारणा के तहत ग्रोथ कॉरीडोर और उस पर व्यवसायिक गतिविधियों के विकास का प्रयास किया जा रहा है।

शहरों को मिलेगी वॉक-टू- वर्क सुविधा
नए मास्टर प्लान में शहरों में प्रदूषण रहित वातावरण बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ गिफ्ट सिटी जैसी वॉक टू वर्क सुविधा देने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत करने पर भी जोर है। इसके लिए जरूरत के अनुसार ओवरब्रिज, अंडरब्रिज, चौड़ी सड़कों के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ सेल्फ सस्टेनेबिलिटी यानी शहरों को अपनी ऊर्जा, कचरा प्रबंधन आदि जरूरतों को खुद ही पूरा करने वाला बनाने की व्यवस्थाएं रहेंगी। सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था के भी भविष्य को देखते हुए प्रावधान शामिल किए गए हैं।

हाईराइज बिल्डिंग से वर्टिकल डेवलपमेंट
नए मास्टर प्लान में कृषि भूमि को बचाने के लिए वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके लिए एफएआर बढ़ाने के साथ शहर में अधिकांश फोर और सिक्सलेन सड़कों के प्रावधान किए गए हैं। क्योंकि सड़कों के दोनों तरफ हाईराइज बिल्डिंग बनेंगी। कमर्शियल डेवलपमेंट बढ़ाने के लिए मेट्रो के दोनों और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट होगा। यहां एफएआर भी ज्यादा मिलेगा। यहां मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आदि बनेंगे। कॉलोनियों की सड़कें भी कम से कम 9 मीटर चौड़ी होंगी।

फ्लैटेड इंडस्ट्री का भी होगा प्रावधान
मास्टर प्लान में उद्योगों को बढ़ावा देने का भी ध्यान रखा गया है। इसलिए फ्लैटेड इंडस्ट्री के प्रावधान किए गए हैं। बहुमंजिला इमारत के फ्लैट में भी इंडस्ट्री लगाई जा सकेंगी। व्हाइट और ग्रीन श्रेणी के उद्योग कॉलोनी के अंदर भी चल सकेंगे। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार भी बढ़ेगा। निजी कॉलोनाइजर यदि अपनी कॉलोनी में अस्पताल, स्कूल, वृद्धाश्रम बनाएंगे तो उन्हें ज्यादा एफएआर मिल सकेगा।

धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों के भी बनेंगे मास्टर प्लान
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मप्र के संचालक कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के अनुसार प्रदेश में धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों के भी अलग से मास्टर प्लान बनाए जा रहे हैं। उज्जैन का नया मास्टर प्लान लागू हो चुका है। जबकि ओंकारेश्वर, चित्रकूट, महेश्वर, मांडू, ओरछा, सांची, सलकनपुर, अमरकंटक का भी नया मास्टर प्लान बनाया जाएगा। प्रदेश में धर्म स्थलों के साथ पर्यटन स्थलों पर भी सैलानियों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए इन शहरों की आगामी 30 से 50 साल तक की प्लानिंग की जाएगी। यहां आने वालों के लिए सुविधाएं विकसित होंगी।

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