चेन्नई
तमिलनाडु की राजनीति में एक नया सियासी समीकरण आकार लेता दिख रहा है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) और पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) के बीच बातचीत अब गंभीर दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। दोनों पक्षों के बीच संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चा चल रही है और मामला अब कैबिनेट में जगह देने तक पहुंच गया है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा पेंच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ PMK के रिश्ते का है। किसी भी औपचारिक फैसले से पहले PMK को BJP के साथ अपने समीकरण पर फैसला करना होगा।
उपचुनाव में PMK ने किसी का साथ नहीं दिया
PMK ने 2026 का विधानसभा चुनाव AIADMK-BJP गठबंधन के साथ मिलकर लड़ा था। अनबुमणि रामदास के नेतृत्व वाले धड़े को 18 विधानसभा सीटें दी गई थीं और उसने चार सीटों पर जीत हासिल की। लेकिन अब 6 अक्टूबर को होने वाले मदुरंतकम और धरापुरम उपचुनाव में पार्टी ने किसी भी दल को समर्थन नहीं देने का फैसला किया है। खास तौर पर मदुरंतकम में PMK का यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां वन्नियार समुदाय के बीच पार्टी के समर्थन से AIADMK को फायदा मिल सकता था, लेकिन TVK यहां मजबूत होती नजर आ रही है। TVK के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, PMK का यह तटस्थ रुख दोनों दलों के बीच चल रही बड़ी राजनीतिक बातचीत का हिस्सा हो सकता है।
अनबुमणि और विजय के सलाहकार के बीच बातचीत
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों दलों के बीच बातचीत मुख्य रूप से PMK नेता अनबुमणि रामदास और सीएम विजय थलपति के राजनीतिक सलाहकार जॉन अरोकीआसामी के जरिए हो रही है। बातचीत से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, दोनों के बीच राजनीतिक संपर्क कोई नया नहीं है।
2016 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी अरोकीआसामी ने PMK की राजनीतिक रणनीति पर काम किया था। उस चुनाव में अनबुमणि रामदास को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया गया था और अभियान का नारा था- ‘मात्रम, मुन्नेत्रम, अनबुमणि’। अब यही राजनीतिक संपर्क संभावित सत्ता-साझेदारी की चर्चा तक पहुंच गया है।
PMK को विजय कैबिनेट में दो जगह देने का प्रस्ताव?
रिपोर्ट में TVK सूत्रों के हवाले से लिखा है कि बातचीत में PMK को विजय सरकार की कैबिनेट में दो जगह देने का प्रस्ताव भी शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार एक कैबिनेट पद अनबुमणि रामदास की पत्नी और विधानसभा में PMK की फ्लोर लीडर सौम्या अनबुमणि को मिल सकता है। दूसरा पद PMK विधायक ए. गणेश कुमार को दिए जाने की चर्चा है।
हाल के दिनों में उपचुनाव के बाद सौम्या अनबुमणि को कैबिनेट में जगह दिए जाने की चर्चा अलग से भी सामने आई है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
सौम्या अनबुमणि के पास अपना मजबूत चुनावी जनादेश
सौम्या अनबुमणि इस बातचीत में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार भी लेकर आती हैं। उन्होंने धर्मपुरी विधानसभा सीट पर 93,713 वोट हासिल करके जीत दर्ज की थी। उन्होंने TVK उम्मीदवार को 20,896 वोटों के अंतर से हराया था। यानी उनके पास खुद का चुनावी जनादेश है, जो संभावित सत्ता-साझेदारी की बातचीत में PMK के लिए अहम हो सकता है।
विजय की जीत बड़ी, लेकिन बहुमत से अभी दूर
TVK के लिए PMK को अपने साथ लाने की कोशिश सिर्फ गठबंधन विस्तार का मामला नहीं है। इसके पीछे सरकार में अपनी स्थिति मजबूत करने की जरूरत भी है। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK ने पिछले चुनाव में 108 सीटें जीती थीं। बहुमत के आंकड़े से वह 10 सीट दूर रह गई थी। इसके बाद छोटी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनी।
AIADMK विधायकों के इस्तीफों के बाद उपचुनाव की स्थिति बनी और विजय के पास अपनी स्थिति मजबूत करने का एक और रास्ता खुल गया। TVK के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, उपचुनाव के नतीजे अगली दौर की बातचीत का रुख तय कर सकते हैं। अगर TVK आराम से जीतती है तो विजय ज्यादा मजबूत स्थिति से बातचीत कर पाएंगे। वहीं कमजोर प्रदर्शन की स्थिति में बाहर से आने वाले हर विधायक की अहमियत बढ़ेगी और PMK की सौदेबाजी की ताकत भी बढ़ सकती है।
PMK क्यों है विजय के लिए अहम?
TVK नेताओं के मुताबिक, PMK की सबसे बड़ी ताकत उसका वन्नियार आधार है। यह समुदाय उत्तरी तमिलनाडु के कई महत्वपूर्ण हिस्सों और कुछ अन्य इलाकों में केंद्रित है। तमिलनाडु के दलित मतदाताओं की तुलना में PMK ने वन्नियार समुदाय के बीच दशकों में एक स्पष्ट राजनीतिक आधार तैयार किया है। यही वजह है कि TVK के भीतर PMK को संभावित गठबंधन सहयोगी के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
PMK के आने से VCK के सामने नई मुश्किल
लेकिन PMK को विजय के गठबंधन में शामिल करना इतना आसान भी नहीं होगा। इसकी वजह TVK का एक अन्य सहयोगी दल विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) है। तमिलनाडु की राजनीति में PMK और VCK के राजनीतिक आधारों के बीच टकराव का इतिहास रहा है। दोनों दलों के समर्थक समुदाय राज्य के कुछ संवेदनशील जातीय विवादों में आमने-सामने भी रहे हैं।
इसके बावजूद TVK नेताओं का मानना है कि VCK के लिए विजय का साथ छोड़ना मुश्किल होगा। उनका तर्क है कि चुनाव में दलित मतदाताओं के एक हिस्से का समर्थन सीधे विजय की ओर जाता दिखाई दिया है।
VCK से जुड़े लोगों के मुताबिक, पार्टी के भीतर भी इस संभावना को लेकर जागरूकता है कि उसके पारंपरिक वोटरों के कुछ हिस्से TVK के साथ अलग राजनीतिक रिश्ता बना रहे हैं। VCK पहले ही सरकार में शामिल है और उसके पास कैबिनेट पद भी है।
PMK आई तो वाम दल भी दूर हो सकते हैं
विजय के लिए एक दूसरी चुनौती वाम दलों से जुड़ी है। TVK नेताओं को आशंका है कि PMK के औपचारिक रूप से गठबंधन में शामिल होने के बाद कम्युनिस्ट पार्टियां उससे और दूरी बना सकती हैं। यह दूरी पहले ही दिखाई देने लगी है। CPI और CPI(M) ने कहा है कि वे TVK गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और उपचुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ रहे हैं। ऐसे में PMK को साथ लाकर विजय अपनी सरकार को मजबूत तो कर सकते हैं, लेकिन इससे मौजूदा गठबंधन के कुछ सहयोगी असहज भी हो सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल BJP से रिश्ते का
अनबुमणि रामदास के लिए सबसे मुश्किल बातचीत शायद विजय, VCK या AIADMK के साथ नहीं, बल्कि BJP के साथ होगी। PMK ने अप्रैल में AIADMK-BJP गठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ा था। BJP और PMK का रिश्ता सिर्फ एक चुनाव तक सीमित नहीं है। ऐसे में अगर PMK औपचारिक रूप से विजय के खेमे में जाती है तो यह केवल उपचुनाव के बाद होने वाला स्थानीय राजनीतिक बदलाव नहीं होगा। इससे विपक्षी खेमे के भीतर एक अहम राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।
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