रायपुर
मेहनत-मजदूरी से परिवार चलाने वाले श्रमिकों के लिए बच्चों की अच्छी शिक्षा का खर्च कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे परिवारों के बच्चों की पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण प्रभावित न हो, इसके लिए श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना सहारा बन रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बचरवार निवासी निर्माण श्रमिक राजेश कुमार पाण्डेय का परिवार भी इस योजना से लाभान्वित हो रहा है। उनके दो बच्चों को छात्रवृत्ति मिलने से पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में आर्थिक सहयोग मिला है।
राजेश कुमार पाण्डेय निर्माण श्रमिक के रूप में मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आमदनी में घर की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना उनके लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद उनकी इच्छा थी कि आर्थिक परिस्थितियां बच्चों की पढ़ाई में बाधा न बनें और उन्हें आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।
ऐसे समय में मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना ने परिवार को आर्थिक संबल दिया। योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को कक्षा पहली से लेकर उच्च शिक्षा तक अध्ययन के लिए निर्धारित वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। पाण्डेय के दो बच्चों को इसका लाभ मिलने से उनकी शिक्षा से संबंधित आवश्यक खर्चों को पूरा करने में परिवार को मदद मिली है।
पाण्डेय बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रही है। आमदनी सीमित होने के कारण शिक्षा से जुड़े खर्चों की चिंता बनी रहती थी, लेकिन छात्रवृत्ति मिलने से यह आर्थिक दबाव कुछ कम हुआ है। अब वे बच्चों की पढ़ाई को निरंतर जारी रखने और उन्हें बेहतर भविष्य देने के लिए अधिक विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
योजना का लाभ मिलने पर राजेश पाण्डेय ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवार अपनी मेहनत से परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं, लेकिन बच्चों की शिक्षा पर होने वाला खर्च कई बार उनके लिए कठिन हो जाता है। ऐसे में छात्रवृत्ति के रूप में मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके जैसे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहयोग है।
मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से निर्माण श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा से जुड़े रहने और आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ग्राम बचरवार के राजेश पाण्डेय के परिवार की कहानी बताती है कि ऐसी सहायता सीमित आय वाले श्रमिक परिवारों के लिए बच्चों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखने में उपयोगी साबित हो रही है।
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