गिरिडीह उपचुनाव में जातीय समीकरण अहम, भाजपा फीडबैक के आधार पर चुनेगी प्रत्याशी

राज्य

रांची
गिरिडीह विधानसभा में दुर्गापूजा समाप्त होते ही उपचुनाव का माहौल बन जाएगा। पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन से गिरिडीह विधानसभा की सीट खाली हुई है। नवंबर में यहां चुनाव घोषित होने की संभावना है। दो बार से यहां हार का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी के लिए गिरिडीह सीट पर उपचुनाव के लिए एक योग्य प्रत्याशी की तलाश प्रारंभ हो गई है।

प्रदेश के नेता गिरिडीह के कार्यकर्ताओं से फीडबैक ले रहे हैं। इसमें स्थानीय स्तर पर सक्रियता, जाातीय समीकरण और जीत की संभावना वाले नाम पर चर्चा हो रही है। इस विधानसभा में गिरिडीह सदर और पीरटांड़ दो प्रखंड हैं।

गिरिडीह सदर के शहरी क्षेत्र में भाजपा का अच्छा आधार है लेकिन पीरटांड़ में पार्टी पिछड़ जाती है। प्रदेश नेतृत्व प्रत्याशी का नाम तय करते हुए पीरटांड़ क्षेत्र में उस नेता के प्रभाव का आकलन भी कर रहा है।

निर्भय शाहाबादी और सुरेश साव का ओबीसी समाज में आधार
गिरिडीह में पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे निर्भय शाहाबादी करीब 3500 वोटों से सुदिव्य कुमार से परिजित हुए थे।शाहाबादी वैश्य समुदाय से आते हैं और दूसरे ओबीसी समुदाय का भी उन्हें समर्थन मिलता रहा है। इसके अलावा शहरी मध्यवर्ग भाजपा का पारंपरिक वोटबैंक रहा है। लेकिन निर्भय शाहाबादी की उम्र ज्यादा होने की वजह से उनके टिकट पर संशय हो सकता है।

सुरेश साव भाजपा के युवा नेता हैं। वैश्य समाज से ही आने वाले युवा नेता सुरेश साव पूर्व में धनबाद लोकसभा के प्रभारी रहे हैं और पार्टी को जीत दिला चुके हैं। शहरी मतदाताओं से उनका भी नियमित संपर्क है।

पीरटांड़ के संताल बहुल क्षेत्र में सुरेश साव पिछले दस सालों से लगातार सक्रिय हैं। सुरेश साव ने पिछले दिनों बड़ी संख्या में संताल समाज के लोगों को भाजपा की सदस्यता भी दिलाई है।

रवींद्र राय और चुन्नू कांत सामान्य जाति के बड़े नाम
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय भाजपा के बड़े नेता हैं। गिरिडीह जिले के ही निवासी रवींद्र राय पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र राजधनवार से पूर्व में विधायक भी रहे हैं। भूमिहार समाज से आने वाले रवींद्र राय झारखंड भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं।

गिरिडीह विधानसभा में ब्राह्मण और भूमिहार मतदाताओं की अच्छी संख्या भी है। इसके अलावा चुन्नु कांत भी भाजपा प्रत्याशी की रेस में कार्यकर्ताओं की पसंद बताए जा रहे हैं। चुन्नु कांत कायस्थ समाज से आते हैं जिसकी गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में अच्छी संख्या है। स्थानीय होने की वजह से चुन्नु कांत का आम मतदाताओं से लगातार मिलना जुलना भी है।

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