व्योमिका सिंह की प्रेरणादायक कहानी, 6वीं में देखा सपना और 21,650 फीट पर हासिल की कामयाबी

राज्य

 भिवानी
 व्योमिका का अर्थ आकाश है। छठी कक्षा में जब लखनऊ की बेटी व्योमिका सिंह ने अपने नाम का अर्थ जाना तो उसी दिन आकाश में उड़ने का सपना देख लिया।

यह सपना आगे चलकर भारतीय वायुसेना की उड़ान बना। वर्ष 2004 में वायुसेना में शामिल होने के बाद उन्होंने चेतक और चीता हेलीकॉप्टर उड़ाए और जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर के दुर्गम व जोखिम भरे इलाकों में जिम्मेदारी निभाई।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हुई कार्रवाई की जानकारी देश के सामने रखने वाली टीम का हिस्सा बनीं तो उनकी पहचान और व्यापक हुई। लखनऊ की बेटी विंग कमांडर व्योमिका सिंह हरियाणा में भिवानी के बापोड़ा गांव की बहू हैं। फौजियों के इस गांव में व्योमिका की उपलब्धि को स्वजन अपनी बहू के साथ पूरे गांव के गौरव के रूप में देखते हैं।

6वीं क्लास में ही कर लिया था पायलट बनेने का निश्चय
व्योमिका कहती हैं कि छठी कक्षा में जब वह थीं, तो नाम के अर्थ पर चर्चा के दौरान उन्हें पता चला कि व्योम का अर्थ आकाश है। एक सहपाठी ने उनके नाम का अर्थ बताया तो उसी दिन उन्होंने पायलट बनने का निश्चय कर लिया। स्कूल के दिनों में वह राष्ट्रीय कैडेट कोर से भी जुड़ीं।

इसके बाद उन्होंने बीटेक की पढ़ाई पूरी की। वायुसेना अकादमी, डुंडीगल से प्रशिक्षण के बाद उन्होंने चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर उड़ाए। वर्ष 2017 में विंग कमांडर बनीं और 2019 में फ्लाइंग ब्रांच में स्थायी कमीशन मिला। उनके पास 2,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।

वर्ष 2020 में अरुणाचल प्रदेश में कठिन परिस्थितियों के बीच नागरिकों को निकालने वाले बचाव अभियान का नेतृत्व किया। वर्ष 2021 में 21,650 फीट ऊंचे माउंट मणिरंग के पर्वतारोहण अभियान में भी हिस्सा लिया।

मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई के दौरान विंग कमांडर व्योमिका सिंह को विदेश सचिव और कर्नल सोफिया कुरैशी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में अभियान की जानकारी देने की जिम्मेदारी मिली। सैन्य वर्दी में देश के सामने आईं व्योमिका के लिए यह भूमिका उनके लंबे सैन्य जीवन की एक अलग जिम्मेदारी थी।

व्योमिका की करीब 69 वर्षीय बड़ी जेठानी संतोष देवी कहती हैं कि देवरानी ने बापोड़ा का नाम दुनिया में रोशन किया है। उन्हें अपनी छोटी देवरानी पर गर्व है और खुशी है कि उसने यह साबित कर दिया कि म्हारी बहू-बेटी की हिम्मत लड़क्या से कम कोनी। उनका कहना है कि पढ़ने वाली बेटियों को मेहनत कर व्योमिका की तरह साहसी बनना चाहिए।
 
स्वजन डॉ. अशोक, ईश्वर सिंह और एडवोकेट रामौतार सभ्रवाल भी उनकी उपलब्धि पर गर्व जताते हैं। वह अपने परिवार से भारतीय सशस्त्र बलों में जाने वाली पहली सदस्य हैं। उनके पिता आरएस निम हैं।

सैन्य परंपरा की पहचान बना टी-55 टैंक
बापोड़ा की करीब 20 हजार आबादी में दो हजार से अधिक सैनिक और पूर्व सैनिक हैं। पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल वीके सिंह सहित कई सैन्य अधिकारी इस गांव से रहे हैं।

गांव के प्रवेश द्वार पर 1971 के युद्ध में इस्तेमाल टी-55 टैंक इसकी सैन्य परंपरा की पहचान है। व्योमिका के पति दिनेश सिंह सभ्रवाल भी विंग कमांडर हैं। स्वजन के अनुसार परिवार के करीब 10 सदस्य सेना में सेवाएं दे चुके हैं।

 

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