बिहार में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी, पानी टंकियों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने का प्रस्ताव

राज्य

 पटना
 बिहार की पंचायतों में पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाने एवं बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए पानी टंकी पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की योजना सरकार लाने जा रही है।

राज्य में लगभग 70 हजार पानी टंकी पंचायती राज विभाग के एवं 50 हजार से अधिक पानी टंकी लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के हैं।

ऐसे में मिलाकर 1.23 लाख से अधिक पानी टंकी हैं। इसमें इन्हें सौर ऊर्जा से जोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुगम एवं टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।

पंचायती राज विभाग व पीएचईडी ने तैयार किया प्रस्ताव
साथ ही बिजली खर्च में कमी आने और बिजली कटौती के दौरान जलापूर्ति प्रभावित होने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल का जल योजना के तहत बड़ी संख्या में पानी टंकी के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जाती है। पानी पहुंचाने के लिए मोटर पंप का इस्तेमाल होता है, जो मुख्य रूप से बिजली पर निर्भर हैं।

पौने पांच सौ करोड़ रुपये खर्च आने का विभाग को अनुमान
बिजली आपूर्ति बाधित होने या तकनीकी खराबी के कारण कई जगहों पर पानी की आपूर्ति प्रभावित होती है। सौर ऊर्जा का विकल्प मिलने से इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकार के लोक वित्त समिति ने 4809 करोड़ रुपये खर्च की मंजूरी दे दी है। प्रत्येक टंकी पर पांच-पांच किलोवाट के सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।अब आगे की प्रक्रिया पंचायती राज विभाग पूर्ण करनी है।

बिजली खर्च में आएगी कमी
पानी टंकी पर सौर ऊर्जा लगाने से बिजली बिल का बोझ कम करने में भी मदद मिलेगी। इससे पंचायत स्तर पर पेयजल व्यवस्था के संचालन की लागत घटाने की संभावना है

सोलर पैनल लगाने के साथ उनके नियमित रखरखाव और खराब होने की स्थिति में त्वरित मरम्मत की व्यवस्था जरूरी होगी। इससे योजना का लाभ लंबे समय तक मिल सकेगा।

पंचायतों में सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति व्यवस्था विकसित होने से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में मदद मिलेगी।