शाम को तुड़ाई, सुबह मंडी में बिक्री; चाइनीज गेंदे से एक बीघा में 3 क्विंटल तक उत्पादन

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चिकारड़ा (चित्तौड़गढ़)
 खेती में नई तकनीक अपनाकर किसान अब परंपरागत फसलों के साथ नकदी फसलों पर भी ध्यान दे रहे हैं। चिकारड़ा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में गेंदे के फूलों की खेती किसानों के लिए आमदनी का जरिया बन रही है। नीमगांव, नाना खेड़ा, भीखा खेड़ा, झाड़सादड़ी, नंगाखेड़ा, भाटोली, बागरियांन, देवाखेड़ा, जेतपुरा और टीलाखेड़ा सहित आस-पास के गांवों में करीब 60 से 70 बीघा जमीन पर फूलों की खेती की जा रही है। किसान शाम को फूलों की तुड़ाई कर सुबह मंडी पहुंचा रहे हैं।

बीज चयन से शुरू होती है खेती, 20-30 दिन में तैयार होती है पौध
फूलों की खेती में सबसे पहले बीज का चयन किया जाता है। क्षेत्र के किसान अंबर येलो, लड्डू येलो, सिंदूर ऑरेंज, केसरिया, सुपर सिकंदर येलो, अश्वगंधा मेरीगोल्ड येलो, गोल्ड ऑरेंज, शिवराज किंग, बेला, श्रीकर ऑरेंज और चाइनीज बॉल सहित विभिन्न किस्मों की खेती करते हैं। बीज बोने के बाद नर्सरी में 20 से 30 दिन में पौध तैयार होती है। इसके बाद खेतों में रोपाई की जाती है। रोपाई के करीब एक महीने बाद फूल आने लगते हैं। दूसरे महीने से अच्छी तुड़ाई शुरू होती है, जो तीसरे महीने तक चलती है। फसल का जीवन चक्र लगभग तीन से चार महीने का होता है।

एक बीघा में डेढ़ क्विंटल तक उत्पादन, चाइनीज गेंदे की पैदावार ज्यादा
चिकारड़ा (चित्तौड़गढ़) के किसानों के अनुसार, सामान्य किस्मों से एक बीघा में प्रतिदिन करीब एक से डेढ़ क्विंटल फूलों का उत्पादन होता है, जबकि चाइनीज गेंदे की पैदावार तीन क्विंटल तक बताई जाती है। चाइनीज गेंदे के एक फूल का वजन 100 से 150 ग्राम तक होता है, जबकि अन्य किस्मों के फूल 30 से 60 ग्राम तक के होते हैं।

शाम को तुड़ाई, सुबह उदयपुर मंडी में बिक्री
फूलों की तुड़ाई शाम को की जाती है। इसके बाद उन्हें थैलियों में पैक कर सुबह लक्ष्मीपुरा टोल नाके पर पहुंचाया जाता है, जहां से पिकअप वाहनों में भरकर उदयपुर मंडी भेजा जाता है। यहां से प्रतिदिन चार से पांच पिकअप फूल मंडी के लिए रवाना होती हैं। उदयपुर के अलावा निंबाहेड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा, अजमेर और मध्यप्रदेश के बाजारों में भी फूल भेजे जाते हैं।

20 से 30 रुपए किलो तक भाव, सीजन में बढ़ती मांग
किसानों के अनुसार, सामान्य दिनों में फूलों के भाव 20 से 30 रुपए प्रति किलो तक मिल जाते हैं। हालांकि, आवक अधिक होने पर भाव तीन से पांच रुपए किलो तक गिर जाते हैं, जबकि मांग बढ़ने पर कीमतें ऊपर भी जा सकती हैं। एक वर्ष में तीन फसलें लेने की संभावना रहती है। किसानों के मुताबिक, प्रति फसल करीब डेढ़ लाख रुपए की आमदनी हो सकती है। फूलों में रोग की समस्या अपेक्षाकृत कम रहती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर दवा का छिड़काव किया जाता है। तुड़ाई में मजदूरी का खर्च 20 से 50 रुपए प्रति घंटे तक रहता है।

किसानों की जुबानी
मिट्ठू लाल बावरी, किसान, नीमगांव
फूलों की कई किस्में हैं। सही किस्म का चयन कर खेती करने से किसानों को फायदा मिलता है। फूलों का मुख्य बाजार उदयपुर है।

प्रभु लाल बावरी, किसान, नीमगांव
नकदी फसल होने से फूलों की खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। इसकी बिक्री से नियमित पैसा मिलता है और दूसरी फसलों के मुकाबले अधिक मुनाफे की संभावना रहती है।