बारां पुलिस का अनोखा ऐलान, फरार नरेश मीणा की गिरफ्तारी पर मिलेगा सिर्फ 25 पैसे का इनाम

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राजस्थान के बारां जिले के नाहरगढ़ वन विभाग रेंज कार्यालय में तोड़फोड़, वनकर्मियों से मारपीट और जब्त जनरेटर-इंजन छुड़ा ले जाने के मामले में बारां पुलिस ने 'भगत सिंह सेना' प्रमुख नरेश मीणा पर कानूनी शिकंजा और कस दिया है। इस मामले में सबसे दिलचस्प मोड इसलिए आया है क्योंकि बारां पुलिस ने अब फरार चल रहे नरेश मीणा की गिरफ्तारी के लिए 25 पैसे का सांकेतिक इनाम घोषित किया है। बारां पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक आनन्द के नेतृत्व में पुलिस की कई विशेष टीमें पिछले तीन दिनों से नरेश मीणा को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं, हालांकि अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लग पाया है।

राजस्थान की बारां जिला पुलिस द्वारा फरार नेता नरेश मीणा पर 25 पैसे (चवन्नी) का इनाम घोषित करने के पीछे एक सोची-समझी रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक वजह है। सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स रखने वाले नेता पर इतना छोटा इनाम रखकर पुलिस जनता और अपराधी दोनों को एक विशेष संदेश देना चाहती है:

पुलिस के अनुसार, इस इनाम का उद्देश्य किसी को आर्थिक रूप से लालच देकर पकड़वाना नहीं है। पुलिस का मुख्य मकसद जनता के बीच आरोपी की छवि को छोटा, हल्का और कमतर दिखाना है। जब एक बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और नेता पर सिर्फ 25 पैसे का इनाम घोषित होता है, तो यह उनके रूतबे और राजनीतिक कद पर सीधा मनोवैज्ञानिक प्रहार होता है।

पुलिस इस कार्रवाई के माध्यम से यह संदेश देना चाहती है कि कोई व्यक्ति चाहे कितना भी लोकप्रिय हो या उसके कितने भी समर्थक हों, कानून की नज़र में वह केवल एक साधारण वांछित (फरार) आरोपी है। कानून को चुनौती देने वाले का रूतबा पुलिस के लिए 'चवन्नी' के बराबर भी नहीं है।

अक्सर अपराधी भारी-भरकम इनाम (जैसे 25 हजार या 50 हजार रुपये) घोषित होने पर इसे अपनी 'दहशत' या 'रूतबे' के रूप में देखने लगते हैं। 25 पैसे का इनाम रखकर पुलिस उनके इस अहंकार और रील-लाइफ की झूठी प्रतिष्ठा को ज़मीनी हकीकत पर लाकर ध्वस्त करना चाहती है।

इससे पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
राजस्थान पुलिस में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भरतपुर पुलिस ने भी एक मोस्ट वांटेड अपराधी को सामाजिक रूप से नीचा दिखाने और उसके रुतबे को कम करने के लिए इसी तरह से 25 पैसे का इनाम घोषित किया था।

बारां पुलिस एसपी अभिषेक आनंद का साफ रुख है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और वनकर्मियों से मारपीट करने वाले किसी भी आरोपी के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी, चाहे उसका राजनीतिक या सामाजिक दायरा कितना भी बड़ा क्यों न हो।

कौन हैं नरेश मीणा?
नरेश मीणा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राजस्थान विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति (NSUI) से की थी। वे राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (RUSU) के महासचिव भी रह चुके हैं, जहाँ से उन्होंने युवाओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई। कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद उन्होंने पार्टी से बगावत कर कई बार निर्दलीय के रूप में भी किस्मत आजमाई। उन्होंने पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा चुनावों तक में पूरी ताकत से हाथ आजमाया है।

नवंबर 2024 में टोंक जिले की देवली-उनियारा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के दौरान नरेश मीणा ने मतदान केंद्र के बाहर ड्यूटी पर तैनात एक एसडीएम (SDM) को लाइव कैमरे के सामने थप्पड़ जड़ दिया था। इस घटना के बाद समरावता गांव में भारी बवाल और हिंसा हुई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

वर्तमान में नवंबर 2026 में वे बारां जिले के नाहरगढ़ वन विभाग कार्यालय में तोड़फोड़, वनकर्मियों से मारपीट और राजकार्य में बाधा डालने के एक मामले में फरार आरोपी हैं। इसी मामले में बारां पुलिस ने उनके अहंकार को तोड़ने और सामाजिक प्रतिष्ठा को कमतर आंकने के लिए उन पर 25 पैसे का अनोखा इनाम घोषित किया है

पुलिस की लगातार दबिश, पर सफलता नहीं
अटरू पुलिस उप अधीक्षक (DSP) रामानन्द यादव के नेतृत्व में गठित विशेष टीमें नरेश की तलाश में जुटी हुई हैं। इससे पहले अलसुबह पुलिस की भारी टीमें नयागांव स्थित नरेश मीणा के पैतृक घर पर भी पहुंची थीं, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं मिले। शुक्रवार को पुलिस ने तीसरी बार बड़े स्तर पर विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी। इंटेलिजेंस और आसूचना तंत्र के इनपुट के आधार पर राजस्थान व आसपास के इलाकों में संभावित शरण स्थलों पर रेड मारी जा रही है।

डीएसपी रामानन्द यादव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, "कानून की नजर में वांछित कोई भी हो, उसे शरण देने वाला व्यक्ति भी कानूनी रूप से उतना ही बड़ा अपराधी माना जाएगा।"

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद गत 1 नवंबर को शुरू हुआ था जब नाहरगढ़ कस्बे में एक चुनावी सभा के बाद नरेश मीणा समर्थकों की भीड़ के साथ वन विभाग के रेंज कार्यालय में घुस गए थे। वन विभाग द्वारा अवैध ट्यूबवेल का जनरेटर जब्त करने की कार्रवाई के विरोध में कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और कर्मचारियों से हाथापाई हुई।

वन कर्मियों का आरोप है कि भीड़ जब्त किए गए सरकारी माल और जनरेटर को जबरन छुड़ा ले गई। वन विभाग की रिपोर्ट पर अटरू व नाहरगढ़ थाने में राजकार्य में बाधा, सरकारी संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) और बीएनएस (BNS) की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सोशल मीडिया पर एक्टिव, कोर्ट जाने की तैयारी
एक तरफ जहाँ बारां पुलिस जिलेभर में सघन चेकिंग अभियान चलाकर दबिश दे रही है, वहीं दूसरी तरफ नरेश मीणा सोशल मीडिया के जरिए लगातार अपने संदेश जारी कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में एक पोस्ट के माध्यम से कहा था कि वे पुलिस के सामने सरेंडर करने के बजाय अब सीधे न्यायालय की शरण लेंगे।