बरेली
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ आंवला की तीन झीलों को जिंदा कर रहा है। झीलों की सबसे बड़ी दुश्मन जलकुंभी बनं गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने एनजीओ की मदद से जलकुंभी से कंपोस्ट खाद तैयार कराने का फैसला किया है। झील से सटे गांवों में ही जलकुंभी से कंपोस्ट खाद तैयार होगी। किसानों को मुफ्त में जलकुंभी से बनी कंपोस्ट खाद मिलेगी। जुलाई से तीनों झीलों से जलकुंभी निकालने का काम शुरू हो जाएगा। आंवला के लीलौर बुजुर्ग, खनगवां श्याम और बहोड़ा खेड़ा की झीलों को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ पुनर्जीवित कर रहा है। पहले इन झीलों में सालों भर पानी रहता था। देसी-विदेशी पक्षी भी आते थे।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के एक्सपर्ट ने तीनों झीलों का ड्रोन और सेटेलाइट सर्वे का काम पूरा कर लिया है। झीलों के प्राकृतिक स्त्रोत भी चिह्नित किए गए हैं। तीनों झीलों को जिंदा करने में जलकुंभी विलेन बन गई है। 40-40 हेक्टेयर में फैली झीलों में जलकुंभी ने पानी का बहाव रोक दिया है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम कई दिन से बरेली में डेरा जमाई हुई है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए काम करने वाले आंवला के एक एनजीओ को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने सहयोगी बनाया है। ग्राम पंचायतों की मदद जलकुंभी को उठाकर कंपोस्ट पिट तक पहुंचाने में ली जाएगी।
एक दिन पहले डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों में मीटिंग कर ग्रामीणों से बात की। झीलों की जलकुंभी से कंपोस्ट खाद तैयार करने की जानकारी दी। प्रोजेक्ट मैनेजर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, नेहा भटनागर ने कहा कि आंवला की तीन झीलों को पुराने स्वरूप में लाने की योजना पर काम चल रहा है। झीलों में फली जलकुंभी को बाहर निकाल कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी। इसके लिए जमीन भी चिह्नित कर ली गई है। खाद किसानों को निःशुल्क दी जाएगी।
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