पुणे
महाराष्ट्र में बाजी मारने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बिहार में तगड़ा झटका लगा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अन्य दलों के साथ मिलकर नई सरकार बन ली है। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री और तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले लिए हैं। नीतीश कुमार के बीजेपी से अलग होने वाले फैसले की सराहना करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार ने बीजेपी पर निशाना साधा है।
पवार ने कहा कि बीजेपी अपने सहयोगी दलों को खत्म करने की कोशिश कर रही है। नीतीश कुमार ने बीजेपी से अलग होकर अपने राज्य में बिहार जैसे हालात का टाल दिया है। पवार ने दावा किया बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हाल ही में अपने संबोधन में कहा था कि क्षेत्रीय दलों का कोई भविष्य नहीं है और वो सफर नहीं कर पाएंगी। उन्होंने कहा कि केवल बीजेपी ही देश में मौजूद रहेगी।
'बीजेपी अपने सहयोगी पार्टियों को खत्म कर रही'
राकांपा अध्यक्ष ने आगे कहा, इस बयान से यह बात साफ है, जो नीतीश कुमार की भी शिकायत थी कि बीजेपी अपने सहयोगियों को धीरे-धीरे खत्म कर रही है। एक उदाहरण देते हुए पवार ने कहा कि अकाली दल जैसी पार्टी उनके (भाजपा) साथ थी। उन्होंने कहा, 'इसके नेता प्रकाश सिंह बादल उनके साथ थे, लेकिन आज पंजाब में पार्टी लगभग खत्म हो चुकी है।' महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा कई सालों तक साथ रहे। आज बीजेपी प्लानिंग बना रही है कि पार्टी में दरार पैदा करके शिवसेना को कैसे कमजोर किया जा सकता है, उसमें एकनाथ शिंदे और अन्य ने उनकी मदद की है।
चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों से खुद हाथ मिलाती है बीजेपी
पवार ने कहा, 'शिवसेना पर उस पार्टी ने हमला किया जो कभी उसकी सहयोगी थी। कुछ ऐसी ही तस्वीर बिहार में देखने को मिल रही है। जहां, जद (यू) के नीतीश कुमार और भाजपा ने पिछला विधानसभा चुनाव एक साथ लड़ा था। भाजपा की एक और विशेषता यह है कि वह चुनाव के समय एक क्षेत्रीय पार्टी के साथ हाथ मिलाती है, लेकिन यह सुनिश्चित करती है कि उसकी सहयोगी पार्टी के खाते में कम सीटें आएं। यह महाराष्ट्र में भी हुआ।'
बिहार में बन रही थी महाराष्ट्र जैसी स्थिति
एनसीपी प्रमुख ने कहा कि महाराष्ट्र जैसी तस्वीर बिहार में देखी जा रही थी, तो राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही सतर्क हो गए और बीजेपी से नाता तोड़ने का फैसला किया। बीजेपी नेता नीतीश कुमार की कितनी भी आलोचना करें, लेकिन उन्होंने एक समझदारी भरा कदम उठाया है। उन्होंने यह फैसला उस संकट को देखते हुए लिया, जिसे बीजेपी लाने की योजना बना रही है। मुझे लगता है कि उन्होंने अपने राज्य और पार्टी के लिए एक समझदारी भरा फैसला लिया।'
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