कानपुर
आठ अगस्त को आर सक्सेना को दिल्ली से कानपुर आना था। उन्होंने श्रमशक्ति एक्सप्रेस में थ्री एसी का टिकट लिया पर 27 नंबर वेटिंग थी। आना जरूरी था तो वह ट्रेन में सवार हो गए। इसके बाद टीटीई से सीट के बारे में पूछने गए तो उसने चेक करके बताया कि खुद उनकी सीट बी-3 कूपे में कन्फर्म हो गई है। थ्री एसी कोच में उसी तारीख में पांच सीटें अपग्रेड भी हो गई थीं। यह संभव हुआ ट्रेनों में सीटों के रिजर्वेशन चेक करने के लिए दी गई हैंड हेल्ड टर्मिनल मशीन (एचएचटी) के कारण। एचएचटी वेटिंग टिकटधारियों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।
केवल आर सक्सेना ही नहीं, कानपुर सेंट्रल से चलने या गुजरने वाली श्रमशक्ति, शताब्दी सहित 26 ट्रेनों में 22 दिन में ऐसे 876 वेटिंग टिकटधारियों की सीटें इसके जरिए अपने आप कन्फर्म हो गईं। टीटीई को ये मशीनें पांच जुलाई को दी गई हैं। इसके साथ ही टीटीई की मनमानी पर लगाम लग गई और लोगों को उनकी चिरौरी भी नहीं करनी पड़ रही।
आरएसी भी न होती थी कन्फर्म
दरअसल, पहले की व्यवस्था में श्रमशक्ति से लेकर बर्फानी एक्सप्रेस तक, सभी व्यस्त और प्रमुख ट्रेनों में चार्टिंग के बाद थ्री एसी और स्लीपर कोचों की वेटिंग की कौन कहे, आरएसी सीटें तक टीटीई कन्फर्म नहीं करते थे। रेलवे ने जबसे टीटीई को हैंड हेल्ड टर्मिनल मशीनें दी हैं, सबसे अधिक स्लीपर औऱ थ्री एसी कूपे की 10 से 20 नंबर तक की वेटिंग कन्फर्म हो जा रही है।
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