कभी देश के पहले राष्ट्रपति पहुंचे थे देखने, अब गुमनामी का शिकार हुई 130 साल पुरानी लाइब्रेरी

राज्य

नांलदा
बिहार में एतिहासिक धरोहर काफी है लेकिन सरकार की अनदेखी की वजह से कई धरोहर गुमनामी का शिकार हो चुकी हैं। इसमें नालंदा जिला की 130 साल पुरानी लाइब्रेरी का नाम भी शामिल है। नालंदा के देशना गांव (अस्थावां प्रखंड) में मौजूद लाइब्रेरी को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी देखने पहुंचे थे। लेकिन अब राज्य सरकार की बेरुखी से अल-इल्लाह उर्दू लाइब्रेरी का वजूद धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
 
सरकार की बेरुखी का शिकार हुई लाइब्रेरी
एतिहासिक अल-इल्लाह उर्दू लाइब्रेरी का सौंदर्यीकरण काम फंड की इंतजार में रूका हुआ है। आपको बता दें कि राजद के पूर्व विधायक पप्पु खां (नौशादुन नबी) की पहल के बाद सौंदर्यीकरण की आस जगी थी। जब बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार थी उस वक्त अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मंत्री जमा खां और उद्योग मंत्री शहनवाज़ हुसैन ने अल-इल्लाह उर्दू लाइब्रेरी को ई-लाइब्रेरी में बदलने की बात कही थी। लेकिन काग़ज़ी प्रक्रिया में ढिलाई की वजह से पुस्तकालय के लिए फंड जारी नहीं हो सका था। बिहार में हुई सत्ता परिवर्तन के बाद जमा खां फिर से अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मंत्री बनाए गए हैं। इसलिए लाइब्रेरी के सौंदर्यीकरण की आस जगी है।
 
1892 ई. में स्थापित की गई थी लाइब्रेरी
सूत्रों की मानें तो बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार के वक्त दो करोड़ की राशि मंजूर हुई थी। इस साल जनवरी से ही लाइब्रेरी के सौंदर्यीकरण का काम होना था। इस बाबत सीओ के द्वारा रिपोर्ट भी जमा होना था। पर्यटन विभाग ने पत्र भी जारी कर दिया था। लेकिन फिर लाइब्रेरी का काम होल्ड कर दिया गया। चूंकि बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ है तो लाईब्रेरी को ई-लाइब्रेरी में तब्दील करने पर विचार किया जा सकता है। ग़ौरतलब है कि अपने वक्त में ये लाइब्रेरी काफ़ी मशहूर थी। देश के पहले राष्ट्रपति देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी लाइब्रेरी को देखने पहुंचे थे। 130 साल पुरानी लाइब्रेरी 1892 ई. में स्थापित की गई थी।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry