कोलकाता
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने करोड़ों रुपये के पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) भर्ती घोटाले के सिलसिले में कोलकाता की एक विशेष अदालत में एक नया आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसमें 12 व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। 12 व्यक्तियों में से छह डब्ल्यूबीएसएससी के पूर्व अधिकारी हैं और अन्य छह निजी व्यक्ति हैं।
पहला नाम डब्ल्यूबीएसएससी की स्क्रीनिंग कमेटी के पूर्व संयोजक शांति प्रसाद सिन्हा का है, जो घोटाले का सूत्रधार माने जाते हैं। दूसरा नाम डब्ल्यूबीएसएससी के पूर्व सचिव, अशोक कुमार साहा का है और उसके बाद डब्ल्यूबीएसएससी के पूर्व अध्यक्ष, सुबीरेश भट्टाचार्य और पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (डब्ल्यूबीबीएसई) के पूर्व अध्यक्ष, कल्याणमय गांगुली हैं। ये चारों अभी न्यायिक हिरासत में हैं। भट्टाचार्य उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भी हैं।
इनके अलावा, डब्ल्यूबीएसएससी के दो पूर्व कार्यक्रम अधिकारी, पर्णा बोस और समरजीत आचार्य के नाम का भी जिक्र है।
चार्जशीट में नामित छह निजी व्यक्तियों में प्रसन्ना कुमार रॉय, प्रदीप सिंह, जनुई दास, आजाद अली मिर्जा, इमाम मोमिन और रोहित कुमार झा शामिल हैं। सीबीआई ने माना है कि इन सभी ने इस घोटाले में बिचौलिये के तौर पर काम किया।
रॉय की शादी पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी से हुई है, जो इसी आरोप में अब न्यायिक हिरासत में हैं।
सीबीआई ने 30 सितंबर को डब्ल्यूबीएसएससी घोटाले में अपनी पहली चार्जशीट पेश की, जिसमें बताया गया कि पार्थ चटर्जी ने साजिश के पीछे मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में कैसे काम किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 19 सितंबर को घोटाले में अपना पहला आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें उसने पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को घोटाले के मुख्य आरोपी के रूप में उल्लेख किया था।
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