नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी गुजरात विधानसभा चुनाव में भी हिमाचल मॉडल को अपनाने जा रही है। जी हां, मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन को लेकर भाजपा राज्य के स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेगी और उसी आधार पर उम्मीदवारों का फैसला होगा। इसी तरह का फॉर्म्युला पार्टी ने हिमाचल प्रदेश में अपनाया है। पार्टी ने स्टेट को चार क्षेत्रों में बांट दिया है- अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और जामनगर। BJP ने प्रत्येक विधानसभा सीट के लिए पर्यवेक्षक तैनात किए हैं, जो 27 से 29 अक्टूबर तक स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं और भाजपा समर्थक प्रभावशाली लोगों से मिलेंगे।
फाइनल रिपोर्ट में क्या होगा
फीडबैक के आधार पर ही फाइनल रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उसके बाद पार्टी उम्मीदवारों पर फैसला लेगी। साफ है कि फीडबैक लेते समय पर्यवेक्षक विधानसभा के मौजूदा विधायक और क्षेत्र के बाकी भाजपा नेताओं को लेकर बनी आम धारणा को भी टटोलेंगे। इससे उन्हें रिपोर्ट तैयार करने में आसानी होगी।
पार्टी का स्पष्ट मानना है कि विधानसभा चुनाव का टिकट पाने के लिए मौजूदा किसी भी उम्मीदवार की अपनी अलग इमेज और वोटर बेस होना चाहिए, वह केवल काडर वोटों के सहारे ही न बैठा हो।
… तो कटेगा विधायक जी का टिकट
सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि हर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के उम्मीदवार को तय करने में इस रिपोर्ट को तवज्जो दी जाएगी और निगेटिव रिपोर्ट आने पर विधायकों का टिकट कटेगा। वैसे भी, बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने संकेत दिए हैं कि राज्य की 25 फीसदी सीटों पर नए चेहरों को चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा।
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 182 में से 99 सीटें जीती थीं। दूसरे राज्यों से तुलना करें तो गुजरात में भाजपा का प्रचार मॉडल और चुनाव मॉडल अलग है। पार्टी एक चुनाव प्रभारी नियुक्त नहीं करती है, इसके बजाय जिला और विधानसभा प्रभावी बनाए जाते हैं। शीर्ष स्तर पर अमित शाह और दूसरे वरिष्ठ नेता कैंपेन पर नजर रखते हैं।
फिलहाल अमित शाह छह दिन के गुजरात दौरे पर हैं। वह 27 अक्टूबर को दिल्ली लौटेंगे और सूरजकुंड में सभी राज्यों के गृह मंत्रियों की आतंरिक सुरक्षा पर होने वाली एक अहम बैठक में शामिल होंगे। 31 अक्टूबर को शाह एक बार फिर गुजरात जाएंगे और पार्टी के चुनाव प्रचार को आगे बढ़ाएंगे।
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