नई दिल्ली।
सावधि जमा (एफडी) कराने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। बैंकों ने पिछले कुछ महीनों में जमा पर ब्याज दरों में वृद्धि की है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कर्ज की बढ़ती मांग और नकदी की कमी उन्हें कम से कम आधा फीसदी से 0.75 फीसदी दरें और बढ़ाने के लिए मजबूर कर सकती है। सरकारी क्षेत्र के इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) ने इसकी शुरुआत भी कर दी है।
आईओबी ने कहा है कि वह 10 नवंबर से अपनी खुदरा सावधि जमाओं पर ब्याज दरों में 0.60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि नकदी की तंग होती स्थिति और कर्ज में दशक के उच्चतम स्तर की 18 प्रतिशत की वृद्धि तथा जमा में कमी बैंकों को एफडी दरें बढ़ाने पर विवश कर रही है। मौजूदा समय सरकारी और निजी क्षेत्र के कुछ बैंक सामान्य खाताधारकों को एफडी पर 7.50 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं। जबकि वरिष्ठ नागरिकों को आठ फीसदी तक ऊंचे ब्याज की पेशकश कर रहे हैं।
निजी क्षेत्र का एचडीएफसी भी विशेष जमा पर 7.5 फीसदी ब्याज की पेशकश कर रहा है। जून और अक्तूबर के बीच, एसबीआई ने दो से तीन साल की श्रेणी में बढ़ोतरी की। हालांकि, पिछले सप्ताह के दौरान, कुछ सरकारी बैंकों ने विशेष जमा योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ाने का ऐलान किया जिससे उनकी ब्याज दरें 7.4 फीसदी तक हो गई हैं।
कर्ज के मुकाबले जमा पर कम वृद्धि
इस साल मई से अब तक रिजर्व बैंक रेपो दर में 1.90 फीसदी तक इजाफा कर चुका है। बैंकों ने कर्ज पर ब्याज दरें रेपो दर के अनुसार बढ़ाई हैं। लेकिन जमा पर ब्याज दरों में औसतन 0.35 फीसदी तक वृद्धि हुई है। ऐसे में बैंक कर्ज की मांग को देखते हुए जमा पर भी ब्याज दरों में तेज वृद्धि कर सकते हैं।
बैंकों के पास घट रही नकदी
एसबीआई की एक रिपोर्ट में के मुताबिक बैंकों में शुद्ध रूप से अप्रैल, 2022 में औसतन 8.3 लाख करोड़ रुपये की नकदी डाली गई। यह अब करीब एक-तिहाई कम होकर तीन लाख करोड़ रुपये पर आ गई है। ऐसे में ग्राहकों को कर्ज देने के लिए बैंको को भारी नकदी की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में बैंकों के पास जमा पर ब्याज दरें बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
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