GST करदाता क्रेडिट क्लेम करे तो ,प्रदेश के खाते में आ जायेंगे एक हजार करोड़

मध्य प्रदेश राज्य

इंदौर
 प्रदेश के करदाताओं की जेब से निकले कम से कम एक हजार करोड़ रुपये केंद्र के पास जमा है। राज्य के लगभग 400 करदाता यदि अपने जीएसटी रिटर्न फार्म के कुछ कालम की पूर्ति कर दें तो 500 करोड़ रुपये प्रदेश को मिल सकते हैं। राज्य का जीएसटी (वाणिज्यिक कर) विभाग करदाताओं से आग्रह कर रहा है कि अपने रिटर्न फार्म के तय कालम में इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम कर लें। यह आप पर तो टैक्स का कोई बोझ नहीं डालेगा, लेकिन प्रदेश को सैकड़ों करोड़ का राजस्व मिल जाएगा। पांच दिनों से विभाग के अधिकारी न केवल पत्र भेजकर बल्कि एक-एक करदाता को फोन लगाकर यह बात समझाने में जुटे हैं।

प्रदेश के वाणिज्यिक कर आयुक्त लोकेश कुमार जाटव के आदेश के बाद स्टेट जीएसटी ने यह अनोखी मुहिम शुरू की है। 11 नंवबर से ही विभाग के अधिकारी तय करदाताओं को समझाने में जुटे हैं। विभाग ने ऐसे करदाता चिन्हित किए हैं, जिनके खातों में भारी-भरकम अनक्लेम्ड टैक्स क्रेडिट जमा है। छुट्टी के दिन भी अधिकारी और कर्मचारी जीएसटी के दफ्तर पहुंच रहे हैं और करदाताओं को फोन कर रहे हैं। करदाताओं से कहा जा रहा है कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अपने रिटर्न फार्म (3-बी) के कालम में पूरा इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम कर लें जो उनके क्रेडिट दिखाने वाले रिटर्न फार्म 2-बी में दिखाई दे रहा है। इस क्रेडिट को क्लेम करने के लिए 30 नवंबर आखिरी तारीख है।

10 हजार करोड़ की भरपाई की कोशिश

जीएसटी केंद्रीकृत प्रणाली है। लागू होने के साथ ही केंद्र ने प्रविधान लागू किया था कि राज्यों को जीएसटी से राजस्व में होने वाली भरपाई क्षतिपूर्ति केंद्र करेगा। जुलाई से राज्यों की जीएसटी क्षतिपूर्ति केंद्र ने बंद कर दी। क्षतिपूर्ति बंद होने के बाद मप्र को करीब 10 हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान होने का आकलन किया गया। इस घाटे की भरपाई के लिए राज्य का जीएसटी विभाग लगातार कोशिशों में जुटा है। विभाग को पता लगा है कि करदाता अगर क्रेडिट क्लेम करें तो बिना छापे और कार्रवाई के प्रदेश के खजाने में हजारों करोड़ आ सकते हैं।

दरअसल, जीएसटी में नियम है कि किसी वस्तु या सेवा का खरीदार जो टैक्स चुकाता है, वह आगे की बिक्री यानी सप्लाय पर पूर्व में चुकाए गए टैक्स की क्रेडिट (आइटीसी) हासिल कर अतिरिक्त राशि पर टैक्स जमा करेगा। जीएसटी में रिटर्न फार्म 2-बी में टैक्स क्रेडिट नजर आती है। 3-बी में संबंधित करदाता को वह क्रेडिट क्लेम करना होती है। हालांकि कई करदाता 2-बी में नजर आ रही पूरी क्रेडिट क्लेम नहीं कर रहे हैं।

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