नई दिल्ली
आप नेता सत्येंद्र जैन को कोर्ट से फिर झटका लगा है। अदालत ने गुरुवार को धनशोधन के एक मामले में दूसरी बार जैन को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सह-आरोपी अंकुश और वैभव जैन की जमानत याचिका भी खारिज कर दी। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विकास ढुल की अदालत ने जमानत याचिका नामंजूर करते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दलीलों में दम है। उनके पास ऐसे साक्ष्य हैं जिनके आधार पर माना जा सकता है कि तीनों आरोपियों की धनशोधन में अहम भूमिका रही है।
सत्येंद्र जैन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए अदालत ने गुरुवार को कहा कि वह प्रथम दृष्टया अपराध से प्राप्त धन को छिपाने में शामिल थे। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विकास ढुल को अदालत ने दो सह-आरोपियों वैभव जैन और अंकुश जैन के संदर्भ में कहा कि उन्होंने अपराध से अर्जित धन को छिपाने में जैन की मदद की थी और वे भी प्रथम दृष्टया धन शोधन के दोषी हैं।
अदालत ने कहा कि जैन में कोलकाता के एंट्री ऑपरेटरों को नकदी देकर अपराध से अर्जित धन को छिपाने में शामिल थे और उसके बाद शेयरों की बिक्री के नाम पर तीन कंपनियों में नकदी लगाई गई। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा यह दिखाने के लिए किया गया कि ये तीन कंपनियां बेदाग हैं। अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया से अपराध से अर्जित आय चार करोड़ 61 हजार रुपये के एक तिहाई के बराबर धन को सफेद में बदला गया।
इसके अलावा, जैन ने अपनी कंपनी में जे जे आइडियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कोलकाता के एंट्री ऑपरेटरों से आवास प्रविष्टियां प्राप्त करके 15 लाख रुपये के अपराध से अर्जित आय को सफेद बनाने के लिए भी इसी कार्यप्रणाली का उपयोग किया। अदालत ने कहा कि इस तरह जैन एक करोड़ से अधिक के धन शोधन के अपराध में शामिल रहे हैं। काले धन को सफेद में बदलना गंभीर अपराध है। न्यायाधीश ने कहा कि इसलिए जैन को जमानत के लाभ का हक नहीं है।
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