केंद्रीय योजनाओं में हिस्सेदारी से UP निकायों में वेतन का संकट, शिकायतों का समाधान नहीं

उत्तर प्रदेश राज्य

 लखनऊ 

केंद्रीय योजनाओं खासकर अमृत योजना की हिस्सेदारी और एसटीपी के रखरखाव पर होने वाले खर्च से निकाय कर्मियों के सामने वेतन का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय निकाय निदेशालय में इस तरह की लगातार शिकायतें आ रही हैं, लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। केंद्रीय योजनाओं की पहली शर्त यह है कि इसमें केंद्र के साथ ही राज्य और निकायों की भी हिस्सेदारी होगी। राज्य वित्त आयोग से निकाय कर्मियों को वेतन दिया जाता है और इसी को काट कर केंद्रीय योजनाओं में अंशदान दिया जाता है। 

राज्य वित्त आयोग में 10800 करोड़ रुपये इस वित्तीय वर्ष में रखा गया है। प्रदेश में मौजूदा समय 762 निकाय हैं। इनमें 109 नए निकाय हैं। राज्य वित्त आयोग के पैसे अन्य कामों दे दिए जाने की वजह से अधिकतर छोटे निकायों में वेतन का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय निकाय निदेशालय वित्त विभाग से जुड़े एक अधिकारी कहते हैं कि निकायों की समस्याओं के बारे में उच्च स्तर पर जानकारी दे दी गई है। समस्या का समाधान का प्रयास चल रहा है।
 

बंद की जाए कटौती
उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शशि कुमार मिश्रा कहते हैं कि केंद्रीय योजनाओं में निकाय अंश, एसटीपी के रखरखाव और बिजली के भुगतान के लिए राज्य वित्त आयोग से कटौती बंद की जाए। इसके चलते कर्मचारियों के वेतन के लाले पड़े हुए हैं। छोटे निकायों की कौन कहे नगर निगमों में भी बुरा हाल है।

 – अमृत-दो में केंद्र ने दिए 8145 करोड़
– राज्य व निकाय अंश देना है करीब 17000 करोड़
– परियोजना पर कुल खर्च होना है 26000 करोड़
– प्रदेश की 92 निकायों में 105 परियोजनाएं चलेंगे

ये होने हैं काम
– जलापूर्ति, सीवरेज सुविधाएं और सेप्टेज प्रबंधन
– बाढ़ को कम करने के लिए वर्षा जल नाले,
– पार्कों के साथ बच्चों के खेलने की सुविधाएं
 

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