भोपाल
प्रदेश सरकार जमीन और भवन की खरीद फरोख्त में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब प्रॉपर्टी के इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन कराने और उसे डिजिटल लॉकर में रखने की सुविधा देने की तैयारी में है। राज्य सरकार अगले वित्त वर्ष में प्रदेश के कुछ जिलों मे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह व्यवस्था शुरू करेगी और फिर इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। इसको लेकर दस्तावेजों के पंजीयन में आधार नम्बर के उपयोग की वैकल्पिक व्यवस्था की शुरुआत की जा रही है।
वाणिज्यिक कर विभाग के अंतर्गत आने वाला प्रदेश का पंजीयन और मुद्रांक महकमा संपदा 2.0 साफ्टवेयर अगले साल से शुरू करने की तैयारी में है। इस साफ्टवेयर में इलेक्ट्रानिक दस्तावेजों का महत्व बढ़ने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए विभाग इस प्लानिंग पर काम कर रहा है कि जो भी व्यक्ति चाहें वे दस्तावेजों का पंजीयन कराते समय अपने आधार नम्बर उसमें दे सकते हैं। इसका फायदा यह होगा कि आधार नम्बर आने से पंजीयन के लिए क्रेता-विक्रेता को सब रजिस्ट्रार के दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी।
उनके ईकेवायसी के जरिये दस्तावेजों में ई साइन का मिलान होने पर ई स्टांपिंग और ई पंजीयन हो सकेगा। इसका असर यह होगा कि जिस भूूमि, भवन की रजिस्ट्री कराई जाएगी, उसका प्रिंट निकालकर अलग से रखने की जरूरत नहीं होगी। इसका डिजिटल डाक्यूमेंट तैयार हो जाएगा जिसे डिजिटल लॉकर में रखा जा सकेगा।
आधार नम्बर को स्वैच्छिक तौर पर मंजूरी
वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा भारत सरकार के इलेक्ट्रानिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के फैसले के आधार पर पंजीयन (रजिस्ट्री) कार्यालयों में सुशासन के नए कदम उठाने जा रही है। इसके लिए विभाग ने नोटिफिकेशन भी कर दिया है।
इस व्यवस्था में संपदा साफ्टवेयर में बदलाव करके यह व्यवस्था शुरू की जा रही है कि नागरिक उपयोगकर्ता पंजीयन, सर्विस प्रोवाइडर यूजर क्रिएशन, ई पंजीयन, ई स्टांपिंग, दस्तावेजों के पंजीयन के दौरान पक्षकार और गवाहों के सत्यापन तथा दस्तावेज पंजीयन में आधार पंजीयन का काम स्वैच्छिक रूप से लागू किया जा सके।
इन दस्तावेजों के पंजीयन में आधार नम्बर का उपयोग किए जाने के बाद सुशासन की दिशा में नवाचार इस रूप में हो सकेगा कि जमीन के सौदे में होने वाले फर्जीवाड़ों में और कमी आएगी।
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