MQ-9 ड्रोन खरीद सकता है भारत, अल-कायदा चीफ अयमान अल-जवाहिरी को किया था ढेर

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 नई दिल्ली 

MQ-9 रीपर, कहा जाता है कि अमेरिका के इसी घातक ड्रोन ने आतंकवादी संगठन अल-कायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी को ढेर किया था। अब खबर है कि भारत भी तीनों सैन्य सेवाओं के लिए ये ड्रोन्स हासिल करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है। साल 2017 में भारतीय नौसेना इन ड्रोन्स को दो साल के लिए लीज पर ले चुकी है।

खबर है कि भारत MQ-9 रीपर ड्रोन्स हासिल करने के लिए अमेरिका के साथ बिलियन डॉलर डील कर सकता है। ये ड्रोन्स हंटर किलर अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स यानी UAV की श्रेणी में आते हैं। लेजर गाइडेड हेलफायर मिसाइल का इस्तेमाल करने वाले इन ड्रोन्स को सबसे घातक माना जाता है। जवाहिरी को अगस्त में मार गिराया गया था।

एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि गुरुवार को होने वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में चर्चा के लिए ड्रोन की खरीदी से जुड़े प्रस्ताव को भी शामिल किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस परिषद के प्रमुख हैं। साथ ही इसमें रक्षा मंत्रालय के जूनियर मंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और कई शीर्ष अधिकारी भी इसके सदस्य हैं। इस ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी करने, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों के लिए किया जाता है। इसे ग्राउंड स्टेशन और तैरते जहाज से भी नियंत्रित किया जा सकता है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि सरकार हर एक सेवा के लिए 10-10 यानी कुल 30 MQ-9 रीपर ड्रोन्स हासिल करने की योजना है।

ड्रोन के बारे में समझते हैं
MQ-9 रीपर ड्रोन्स का निर्माण जनरल एटॉमिक्स ने किया है। भारत अमेरिका से ये ड्रोन्स सैन्य खरीदी के जरिए करेगा। इस व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिका सरकारों के बीच सौदे के लिए करता है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया है कि भारत ने इसके दूसरे विकल्प भी देखे, लेकिन खूबियों के लिहाज से MQ-9 रीपर ड्रोन्स के आसपास कोई नहीं टिका। कहा जा रहा है कि इन ड्रोन्स को लेकर चर्चाएं भारत में जारी थी, लेकिन स्थानीय निर्माण की गुंजाइश नहीं होने के चलते इसे DAC के सामने नहीं लाया गया था। इसे अलावा ज्यादा कीमत होना भी इसका बड़ा कारण था।
 

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