नईदिल्ली
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल बनाए जाने की संभावना है। पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के अपने पद से हटने की इच्छा व्यक्त की थी, इसके कुछ दिनों बाद इस तरह की खबर सामने आ रही है।
पंजाब के पूर्व अमरिंदर सिंह ने 2021 में कांग्रेस छोड़ दी और पंजाब लोक कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। सितंबर 2022 में उन्होंने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया। अब ऐसा बताया जा रहा है कि वह महाराष्ट्र के नए राज्यपाल हो सकते हैं।
हालांकि, अमरिंदर सिंह के करीबी ने कहा है कि अभी कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
बीजेपी के पूर्व दिग्गज नेता कोश्यारी ने एक बयान में कहा था कि उन्होंने हाल ही में मुंबई के दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पद छोड़ने की अपनी इच्छा से अवगत कराया था। हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान आया नहीं है।
सितंबर 2019 में राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालने वाले कोश्यारी पर तत्कालीन महाराष्ट्र विकास अघाड़ी की सरकार इल्जाम लगाती रही थी। गठबंधन की सरकार उन्हें बार-बार हटाने की भी मांग करती आई थी। महाराष्ट्र की मूर्तियों का कथित रूप से अपमान करने और इतिहास को विकृत करने के लिए विपक्षी दलों ने भी उनकी आलोचना की है।
महाराष्ट्र के गवर्नर कोश्यारी पद छोड़ने की बात कह चुके
महाराष्ट्र के मौजूदा गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी पिछले कुछ समय से विवादों में हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि वे प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान पद छोड़ने की इच्छा जता चुके हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में नए राज्यपाल की नियुक्ति तय मानी जा रही है। आर्मी से रिटायर्ड कैप्टन अमरिंदर अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस (PLC) का भाजपा में विलय कर चुके हैं।
पराष्ट्रपति के लिए भी नाम चला, तब कैप्टन बीमार थे
कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए भी चर्चा में आया था। हालांकि बाद में भाजपा ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे जगदीप धनखड़ को उम्मीदवार बना दिया था। उस वक्त कैप्टन विदेश में इलाज करा रहे थे। तब तक कैप्टन ने अपनी पार्टी को भी अलग रखा हुआ था।
पंजाब में कांग्रेस को हराने में कामयाब रहे
पंजाब विधानसभा चुनाव से तीन महीने पहले कांग्रेस ने कैप्टन को मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया था। कैप्टन ने कांग्रेस छोड़ दी और BJP से हाथ मिला लिया। चुनाव में कैप्टन सीधे तौर पर कोई करिश्मा नहीं दिखा सके। भाजपा भी ज्यादा सीटें नहीं जीत पाई। कैप्टन खुद पटियाला से चुनाव हार गए, लेकिन भाजपा पंजाब से कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में कामयाब रही।
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