दस दिन देरी से लीची में आया मंजर, पारा बढ़ा तो पैदावार पर होगा असर 

राज्य

 मुजफ्फरपुर 
मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण इस साल लीची में मंजर आने में दस दिनों का विलंब हुआ है। शाही लीची में मंजर अमूमन 10 जनवरी से आने लगता है और 25 जनवरी तक पूरी तरह से दिखाई देने लगता है। लेकिन, इस बार 20 से 25 जनवरी के बीच में पेड़ों में मंजर आया है और पांच फरवरी तक इसके पूरी तरह से दिखाई देने की उम्मीद है। वहीं, चाइना लीची इस बार 15 फरवरी तक पूरी तरह से मंजर दिखाई दे सकता है। पहले पांच फरवरी तक मंजर पूरी तरह से दिखाई देने लगता था।

तापमान अनुकूल न होने से मंजर में विलंब
कृषि वैज्ञानिक रोहित मौर्य ने बताया कि इस बार तापमान अनुकूल नहीं होने से लीची के मंजर आने में विलंब हुआ है। 15 दिसंबर को तापमान 15 से 22 डिग्री तक रह रहा था। जबकि उस समय लीची के लिए तापमान 10 से 14 डिग्री होना चाहिए था। ऐसा नहीं होने से ही मंजर 10 से 15 जनवरी के बीच आने की बजाए 20 से 25 जनवरी के बीच आना शुरू हुआ है। अब लीची के लिए तापमान 15 से 24 डिग्री के बीच होनी चाहिए। अगर इससे अधिक पारा बढ़ा तो फूल झड़ सकते हैं। अभी स्थिति ऐसी ही बन रही है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहा है।इधर, उद्यान रत्न किसान भोलानाथ झा ने बताया कि वर्तमान में जो तापमान है वह लीची के मंजर के लिए अनुकूल है। अगर इससे अधिक पारा बढ़ता है तो परेशानी होगी। कांटी प्रखंड के कपड़पुरा के लीची किसान भोला त्रिपाठी ने बताया कि शाही में धीरे-धीरे मंजर आ रहा है, लेकिन चाइना में अभी मंजर नहीं दिख रहा है। 

पारा बढ़ा तो मंजर झड़ने का खतरा
पौधा संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक ने बताया कि विलंब से आने से लीची के मंजर को अधिक तापमान का सामना करना पड़ सकता है। इससे मंजर के झड़ने व फल कम लग सकते हैं। इसका असर पैदावार पर पड़ेगा। बताया कि जब औसत तापमान 30 डिग्री से अधिक हो तो किसानों को बागों में सिंचाई करना चाहिए, ताकि मंजर झड़े नहीं और उसको पोषक तत्व मिलता रहे। किसान प्लानोफिक्स दवा का भी छिड़काव कर सकते हैं।

बीते वर्ष 85 फीसदी मंजर आया था। इस साल मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण 60 फीसदी ही मंजर आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, पौधा संरक्षणा विभाग के सहायक निदेशक राधेश्याम कुमार ने बताया कि लीची में मंजर आने के समय कीटनाशक का छिड़काव न करें। मंजर निकलने के एक सप्ताह बाद इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल का एक एमएल प्रति तीन लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
 

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