कोलकाता
पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में जांच की 'धीमी' रफ्तार से हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है। जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने सीबीआई को सख्त लहजों में सात दिन के अंदर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया। यह भी कहा है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिकायत कर सकते हैं। इतना ही नहीं मामले में काम कर रहे अधिकारियों की संपत्तियों की जांच के भी आदेश देंगे।
पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) घोटाले के संबंध में धीमी जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को फटकार लगाते हुए न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने कहा कि पिछले दस महीनों में जांच में प्रगति नहीं हुई। न्यायमूर्ति ने कहा, "सीबीआई पिछले दस महीनों से क्या कर रही है? पूरा राज्य उनकी जांच की प्रतीक्षा कर रहा है।"
अदालत ने कहा, "केंद्रीय एजेंसी ने इस तरह का उदासीन रुख अपनाया है। मुझे लगता है कि मुझे सीबीआई के बजाय इंग्लैंड के एमआई 5 में विश्वास रखना होगा।" 31 जनवरी को उच्च न्यायालय ने घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की विशेष जांच टीम (एसआईटी) को भंग कर दिया था।
पिछले साल नवंबर में, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एसआईटी से दो अधिकारियों को हटा दिया था और चार नए जांचकर्ताओं को नियुक्ति करने का आदेश दिया था। इतना ही नहीं बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और छह अन्य की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई और इन सभी को 16 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। भर्ती घोटाले के सिलसिले में चटर्जी को प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के साथ गिरफ्तार किया था।
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