भोपाल
राज्य सरकार 14 फरवरी को बाजार से एक बार फिर तीन हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज उठाएगी। पिछले 15 दिन में सरकार पांच हजार करोड़ रुपये का कर्ज बाजार से ले चुकी है और नए लिए जाने वाले कर्ज को मिलाकर यह राशि आठ हजार करोड़ रुपये हो जाएगी।
इस कर्ज का पूर्ण भुगतान 11 वर्ष में किया जाएगा तथा इस बीच वर्ष में दो बार कूपन रेट पर ब्याज का भुगतान किया जाएगा। राज्य सरकार एक के बाद एक लगातार कर्ज इसलिए लिए जा रही है, क्योंकि वर्तमान वित्त वर्ष में उसे मिले कर्ज की सीमा का उपयोग इस वित्त वर्ष के समाप्त होने के पूर्व किया जा सके।
वर्तमान वित्त वर्ष में राज्य सरकार अब तक 17 हजार करोड़ रुपये का कर्ज अपनी सिक्युरिटीज का विक्रय कर ले चुकी है तथा इस नए कर्ज को मिलाकर यह राशि 20 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी। राज्य सरकार पर कर्ज का कुल भार तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है
गौरतलब है कि एमपी की शिवराज सरकार ने इससे पहले 31 जनवरी और 4 फरवरी को रिजर्व बैंक में बांड गिरवी रखकर कर्ज लिया था. इस कर्ज को शिवराज सरकार साल 2034 तक आरबीआई को इसका ऋण चुकाएगी. मिली जानकारी के मुताबिक शिवराज सरकार अब तक 3 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज ले चुकी है. जिसपर हर साल करीब 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज चुकाना पड़ रहा है.
3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज
इस साल मध्यप्रदेश में चुनाव होने वाले हैं, और फिलहाल एमपी की शिवराज सरकार 2023 के लिए नया बजट तैयार करने में जुटी है. ऐसे में इस बार 3 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. बजट सत्र 27 फरवरी से 27 मार्च तक चलेगा. ये बजट इस लिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि सरकार की निगाहें इस साल होने वाले चुनाव पर है. गौर करने वाली बात है कि जितना सरकार बजट इस सत्र के लिए निर्धारित कर रही है, उतना ही कर्ज सरकार पर है. यानी 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज.
वित्तीय घाटे में सरकार
साल 2022 में मध्यप्रदेश सरकार को 57 हजार करोड़ का वित्तीय घाटा हुआ है. राज्य में कमाई से अधिक खर्च हो रहे हैं. इसी की पूर्ती के लिए सरकार कर्ज ले रही है. जिसे विभिन्न योजनाओं में खर्च करना है. अभी तक सरकार पर जो कर्ज है उसके लिए हर सला बतौर किस्त उसे 46 हजार करोड़ रुपए देने पड़ रहे हैं.
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