नई दिल्ली
गैंगस्टर से राजनेता बने आनंद मोहन को आज तड़के सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई का चौतरफा विरोध हो रही है। गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया के परिवार सहित आईएएस एसोसिएशन ने बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। दलित डीएम की बेटी पद्मा ने इसे गलत निर्णय करार दिया है। आपको बता दें कि 1994 में ऑन ड्यूटी डीएम जी कृष्णैया की हत्या कर दी गई थी। आनंद मोहन सिंह को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, डीएम के परिजनों ने फांसी की मांग की थी। बिहार सरकार ने कानून में संसोधन करते हुए उनकी रिहाई का रास्ता आसान कर दिया।
पद्मा ने हैदराबाद में कहा, ''नीतीश कुमार ने जो आनंद मोहन की रिहाई का फैसला लिया है वह बहुत ही गलत है। हम चाहते हैं कि सरकार इसपर पुनर्विचार करे। हम इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।'' वहीं, आंध्र प्रदेश के आईएएस एसोसिएशन ने गोपालगंज के पूर्व जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के दोषियों की रिहाई पर आपत्ति जताई है और बिहार सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
पत्नी ने भी किया था विरोध
इससे पहले जी. कृष्णैया की पत्नी ने भी रिहाई का विरोध किया था। उनका कहना है कि आनंद मोहन को तो फांसी होनी चाहिए थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस फैसले को वापस लेने की अपील की है। उमा कृष्णनैया ने कहा था, "यह अच्छा फैसला नहीं है। हम पहले भी आजीवन कारावास के फैसले से खुश नहीं थे। लेकिन अब तो उन्हें रिहा किया जा रहा है। वह राजनीति में प्रवेश करेंगे। हम इस कदम से सहमत नहीं हैं। यह एक तरह से अपराधियों का मनोबल बढ़ाने वाला फैसला है।''
उन्होंने यह भी कहा था कि, ''नीतीश कुमार हत्या के दोषी व्यक्ति को रिहा करके एक भयानक मिसाल कायम कर रहे हैं। यह अपराधियों को सरकारी अधिकारियों पर हमला करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, क्योंकि वे जानते हैं कि वे आसानी से जेल से बाहर निकल सकते हैं। महज चंद राजपूत वोटों के लिए उन्होंने ऐसा फैसला लिया है। राजपूत समुदाय को इस पर विचार करना चाहिए। क्या वे चाहते हैं कि आनंद मोहन जैसा अपराधी राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व करे।''
चिराग पासवान ने किया आनंद मोहन की रिहाई का विरोध
लोजपा (रामविलास) अध्यक्ष चिराग पासवान ने आनंद मोहन की रिहाई का विरोध किया है। आरोप लगाया है कि राजनीतिक फायदे के लिए कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। व्यक्ति विशेष के लिए कानून में अचानक किया गया यह बदलाव कहीं न कहीं जातीय आधार पर बांटने की साजिश को दर्शाता है। बिहार में एक जिम्मेदार आईएएस अधिकारी की हत्या तो हुई है, इस बात को ना तो दबाया जा सकता है और ना झुठलाया जा सकता है, लेकिन उसके दोषी को कानून में फेरबदल कर इस तरीके से रिहाकर दिया जाना कहीं से उचित नहीं है। राज्य सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।
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