अमेरिका
संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच हथियारों को लेकर ऐसी डील की गई है, जिसके बाद उत्तर कोरिया का बौखलाना तय माना जा रहा है। वहीं, कई सैन्य जानकारों का कहना है, कि इस डील के साथ ही, भविष्य में होने वाले जंग की बुनियाद रख दी गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-योल के बीच परमाणु-सशस्त्र अमेरिकी पनडुब्बियों और अन्य सैन्य संपत्तियों की दक्षिण कोरिया में तैनाती को लेकर सहमति बन गई है। इस समझौते का मकसद, दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया के खिलाफ अमेरिकी प्रतिरोध का मजबूत वचन देना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच डिप्लोमेटिक संबंध स्थापित होने के 70 साल के मौके को खास बनाने के लिए एक सम्मेलन का आयोजन किया था, जिसमें इस समझौते को लेकर सहमति बनी है, जिसे 'वॉशिंगटन डिक्लरेशन' कहा गया है। अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर यून फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून, केवल दूसरे ऐसे वैश्विक नेता हैं, जिन्हें 2021 में कार्यभार संभालने वाले बाइडेन के व्हाइट हाउस में एक आधिकारिक राजकीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दक्षिण कोरिया अमेरिका के लिए प्रमुख सहयोगी देश है, लिहाजा बाइडेन प्रशासन ने दक्षिण कोरिया को प्राथमिकता दी है।
वहीं, रिपोर्ट ये भी है, कि पीएम मोदी को भी व्हाइट हाउस की यात्रा के लिए न्योता दिया गया है और मई या जून महीने में पीएम मोदी, अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून ने कहा, कि नया 'प्रतिरोध समझौता' द्विपक्षीय रणनीति के "अभूतपूर्व विस्तार और मजबूती" का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों देशों के बीच ये समझौता उस वक्त हुआ है, जब उत्तर कोरिया ने अपने हथियारों के परीक्षण की गति बढ़ा दी है और इसी महीने उत्तर कोरिया ने सॉलिड-ईंधन अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का सफल टेस्ट करने का दावा किया है। राष्ट्रपति यून ने कहा, कि "राष्ट्रपति बाइडेन ने कोरिया गणराज्य के लिए विस्तारित प्रतिरोध के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की है।"
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