पत्नी की हत्या में गवाही से मुकरा पति, रेप कर मर्डर करने वाला आरोपी बरी, पति पर केस

उत्तर प्रदेश राज्य

आगरा
आगरा में विवाहिता के साथ दुराचार और गला दबा कर हत्या के मामले में आरोपित धर्मवीर निवासी बरहन को साक्ष्य के अभाव में अपर जिला जज रनवीर सिंह ने बरी करने के आदेश दिए। जबकि अदालत में गवाही से मुकरने पर वादी (मृतका के पति) के विरुद्ध 344 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत विधिक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। आरोपी के अधिवक्ता नीरज पाठक ने मामले में तर्क दिए।

थाना बरहन में दर्ज मामले के अनुसार वादी के मुताबिक 6 मार्च 2017 की रात उसका बेटा व बेटी मोहल्ले में हो रहे कीर्तन में गए थे। रात 9 बजे करीब कीर्तन समापन के बाद घर आकर दरवाजा खटखटाया। दरवाजा अंदर से बंद था। मां को आवाज दी। दरवाजा खुला लेकिन अंदर से आरोपित धर्मवीर घर से भागते हुए दिखा। दोनों अंदर पहुंचे तो वादी की पत्नी मृतावस्था में पड़ी थी। बच्चों की रोने-चीखने की आवाज सुन पड़ोसी पहुंच गए। वादी को फोन से सूचना मिली। वह सादाबाद में आलू की मजदूरी करने गया था। तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया।
 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या होना पाया गया। एफएसएल की रिपोर्ट में मृतका के शरीर व कपड़ों पर मानव वीर्य मिला। इसी के बाद हत्या के साथ दुराचार की धारा की बढ़ोत्तरी की गई। विचारण के दौरान अभियोनज पक्ष की तरफ से वादी व उसका बेटा, बेटी समेत 9 गवाह अदालत में पेश किए गए। गवाही में वादी, उसके बेटे व बेटी ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया।

दुराचार के मामले में पुलिस ने दिखाई घोर लापरवाही
मामले में रही सही कसर पुलिस ने मृतका के शरीर पर बरामद शुक्राणुओं का मिलान आरोपी के शुक्राणुओं से न कराकर कर दी। पुलिस ने उसके वैजाइनल स्लाइड में पाए गए शुक्राणुओं का आरोपी के डीएनए से मिलान नहीं कराया। मिलान करा दिया होता तो गवाहों के मुकरने के बाद भी अभियोजन आरोपित को सजा दिलाने में कामयाब हो जाता। अदालत ने आरोपित के अधिवक्ता व साक्ष्य के अभाव में आरोपित को बरी करने के आदेश दिए। साथ ही गवाही से मुकरने पर वादी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई के आदेश दिए।

 

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