नई दिल्ली
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा है कि कोविड-19 स्थानिक बीमारी बनने के कगार पर है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिक प्रत्येक नए स्वरूप को लेकर कड़ी नजर रख रहे हैं तथा सरकार हाई अलर्ट जारी रखेगी। उन्होंने रेखांकित किया कि कोरोना वायरस जीवित रहने में कामयाब रहा है और यह बरकरार रहने जा रहा है। मंत्री ने कहा कि दुनिया में महामारी के तीन साल से अधिक समय के बाद अब स्थिति स्थिर है, लेकिन घातक साबित हो सकने वाले किसी भी स्वरूप से बचाव के लिए सभी आवश्यक उपाय बरकरार रखे जाएंगे।
कोविड से ठीक होने की दर लगभग 99 प्रतिशत
घातक कोरोना वायरस का पहली बार चीन में 2019 के अंत में पता चला था, जबकि भारत में पहला मामला जनवरी 2020 के अंत में दर्ज किया गया था। तब से, भारत में कोविड-19 के लगभग 4.5 करोड़ मामले सामने आए हैं और कई लहरों के दौरान पांच लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, हाल के महीनों में मामलों की संख्या में काफी कमी आई है और उपचाराधीन मामलों की संख्या अब लगभग 1,800 रह गई है, जिसमें ठीक होने की कुल दर लगभग 99 प्रतिशत और मृत्यु दर लगभग एक प्रतिशत है। इसके साथ ही, भारत में कोविड रोधी टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं और भारत की लगभग 90 प्रतिशत पात्र आबादी का पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका है।
मंत्री ने कहा, कोविड स्थानिक चरण में प्रवेश करने के कगार पर है, लेकिन आईसीएमआर (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) में वैज्ञानिकों की हमारी टीम कोविड के प्रत्येक स्वरूप पर कड़ी नजर रख रही है। अब तक, कोविड के 224 से अधिक स्वरूप देश में देखे गए हैं, प्रत्येक स्वरूप को लेकर निरंतर जीनोम अनुक्रमण किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि जब भी कोई नया स्वरूप मिलता है, उसे अलग किया जाता है और फिर टीके की प्रभावशीलता देखने के लिए परीक्षण किया जाता है तथा यह भी मापा जाता है कि यह कितना घातक है।
मंत्री ने कहा, यह सब एक सतत प्रक्रिया है और हम इस पर बारीकी से नजर रखते हैं, ताकि हम भविष्य में घातक साबित हो सकने वाले किसी भी स्वरूप से निपटने के लिए तैयार रहें। दुनिया भर में स्थिति अभी स्थिर है और भविष्य को ध्यान में रखते हुए हम सतर्क हैं। लेकिन मैं कहूंगा कि यह एक वायरस है और यह वायरस कभी खत्म नहीं होने वाला, क्योंकि यह जीवित रहने में कामयाब रहा है।’’
दुनिया में कोविड से 69 लाख लोगों की मौत
मंत्री ने कहा, जैसे इन्फ्लूएंजा वायरस किसी तरह बच गया है और जब भी कोई नया स्वरूप आता है, तो लोगों को खांसी, बुखार आदि का अनुभव होता है, लेकिन इससे लोगों को ज्यादा नुकसान नहीं होता, ऐसा ही कुछ कोविड के मामले में भी होगा और काफी हद तक अब भी ऐसा ही हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बीमारी को स्थानिक तब कहा जाता है, जब इसकी उपस्थिति एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र के भीतर आबादी में स्थापित पैटर्न के आधार पर स्थिर हो जाती है, जैसा कि मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामले में होता है। वैश्विक स्तर पर, कोविड के 76 करोड़ से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है और इससे अब तक लगभग 69 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक कोविड रोधी टीकों की 1,340 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं।
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