भोपाल
विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी कमेटियों के गठन में भी आदिवासी कार्ड खेला है। चुनाव के लिए महत्वपूर्ण समितियों में शुमार चुनाव अभियान समिति की कमान प्रदेश में आदिवासियों के सबसे बड़े नेता कांतिलाल भूरिया को सौंपी गई है। वहीं इलेक्शन कमेटी का भी मंगलवार को ऐलान कर दिया गया।
इसकी कमान कमलनाथ के पास है, वे कमेटी के चैयरमेन बनाए गए हैं। इधर कमलनाथ दो दिन से दिल्ली में डटे हुए हैं। उनका इस बार का दिल्ली दौरा प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जेपी अग्रवाल पर भारी पड़ सकता है। अग्रवाल को प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी पद से हटाया जा सकता है। भूरिया को कैंपेन कमेटी का चैयरमेन बनाया गया है, उनके निर्देशन में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह से लेकर कमेटी के अन्य सदस्य काम करेंगे। चुनाव की पूरी कैंपेनिंग यह कमेटी करेगी।
इस बार कांग्रेस का कैंपेनिंग में अभी से ज्यादा फोकस है, इसलिए इस बार यह कमेटी ना सिर्फ पिछले चुनावों की तुलना में ज्यादा एक्टिव रहेगी, बल्कि इस बार इफेक्टिव भी रहेगी। प्रदेश में आदिवासी वर्ग के लिए 47 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं, जबकि इनका असर प्रदेश की सौ के लगभग सीटों पर होता है। इसलिए कांतिलाल भूरिया को इस कमेटी का चेयरमेन बनाकर कांग्रेस ने आदिवासी कार्ड खेलने का प्रयास किया है।
दिल्ली में जमे कमलनाथ
चुनाव को लेकर बनाई जा रही समिति को अपने अनुसार बनवाने के लिए कमलनाथ ने खुद दिल्ली में मोर्चा संभाला है। वे इंदौर दौरे के बाद सीधे दिल्ली चले गए थे। उनकी ही सलाह पर भूरिया को कैंपेन कमेटी का चैयरमेन बनाया गया है। वहीं दिल्ली में वे जेपी अग्रवाल को हटाए जाने को लेकर भी सक्रिय हैं।
नाथ से तनातनी जेपी अग्रवाल की छुट्टी भी संभव
सूत्रों की मानी जाए तो पिछले कुछ दिनों से दिल्ली से लेकर भोपाल तक यह सुगबुगाहट तेज है कि प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जेपी अग्रवाल को हटाया जा सकता है। दरअसल कमलनाथ और जेपी अग्रवाल दोनों के बीच में कई महीनों से सब ठीक नहीं चल रहा है। दोनों नेता एक दूसरे के निर्णय से सहमत नहीं हो रहे हैं। इसके चलते जेपी करीब दो महीनों से भोपाल में कम ही सक्रिय दिखाई दिए। हालांकि बीच-बीच में वे कमलनाथ के साथ कुछ बैठकों में शामिल हुए, लेकिन वे अधिकांश बैठकों में चुप ही रहे। नाथ और अग्रवाल के बीच आपस में नहीं बनने की खबर दिल्ली तक कई दिनों पहले पहुंच चुकी है।
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