लंदन
ब्रिटेन भारतीय दूतावास के सामने 78वें स्वतंत्रता दिवस को 'काला दिवस' के रूप में मनाते हुए सिखों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में इंग्लैंड के विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग शामिल हुए। 19 मार्च को लंदन में भारतीय दूतावास पर हुए हमले और तिरंगे के अपमान के बाद किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए बड़ी संख्या में UK पुलिस को भारतीय दूतावास की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने फिर से खालिस्तानी झंडे लहराए और तिरंगे का अपमान किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए दूतावास के पास किसी भी व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं दी गई।
विरोध प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि भारत सरकार अल्पसंख्यकों को दबाने के लिए लगातार अत्याचार कर रही है। उन्होंने कहा कि काले कानूनों के तहत सिख युवाओं को गिरफ्तार कर डिब्रूगढ़ की जेलों में बंद किया गया है। वक्ताओं ने पंजाब की आज़ादी और खालिस्तान की स्थापना तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।वक्ताओं ने कहा कि भारत में न केवल सिख, बल्कि कश्मीरी, मुस्लिम, और दलित समुदाय भी सरकार की हिंदूवादी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। मोदी सरकार उन पर लगातार अत्याचार कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की अल्पसंख्यक विरोधी नीतियों को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उजागर किया जाएगा। वक्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि मानवाधिकारों का हनन करने वाले देश भारत का बहिष्कार किया जाए और उसे आर्थिक रूप से कमजोर किया जाए।
भारतीय दूतावास के सामने बड़ी संख्या में खालिस्तानी झंडे लहराए गए। इस विरोध प्रदर्शन में सिख फेडरेशन यूके के वरिष्ठ नेता भाई कुलवंत सिंह मुथड़ा, भाई बलविंदर सिंह ढिल्लों, एफएसओ के कोऑर्डिनेटर भाई जोगा सिंह, लवसिंदर सिंह डल्लेवाल, अमरीक सिंह सहोता, भाई रघबीर सिंह, भाई मनप्रीत सिंह, भाई गुरप्रीत सिंह, भाई परमजीत सिंह पम्मा, भाई रणधीर सिंह, जसबीर सिंह घुम्मन, केहर सिंह बर्मिंघम और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सरबजीत सिंह सहित कई सिख नेता शामिल थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान भारत विरोधी नारे भी लगाए गए।
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