खजुराहो
दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में, दिनांक 22 अगस्त 2024 को ‘विश्व आख्यान दिवस’ के अवसर पर खजुराहो स्थित शिल्पग्राम में बुंदेलखंड की लोक आख्यान परम्पराओं पर केन्द्रित सांस्कृतिक आयोजन किया गया|
इस आयोजन में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर की कुलपति प्रोफ़ेसर डॉ. सुधा तिवारी जी के मार्गदर्शन में विशेष सहभागिता रही|विश्वविद्यालय के हिंदी अध्ययन शाला एवं शोध केंद्र के प्रोफ़ेसर डॉ. बहादुर सिंह परमार जी द्वारा बुंदेलखंड के लोक आख्यान, उनकी निर्मिती के कारक तथ्य, विशेषताएं जिनमें वीरता, भक्ति एवं प्रेम पमुख घटक हैं के विषय में सविस्तार वर्णन किया गया| उन्होंने आल्हा गायन, धरमा सांवरी अर्थात बुंदेलखंड के लोक आख्यान चिड़ा-चिड़िया की कथा, हरदौल एवं सीता वनवास की कथा के बारे में सारगर्भित जानकारी प्रदान की|
विश्वविद्यालय के इतिहास अध्ययन शाला एवं शोध केंद्र की विभाग प्रमुख प्रोफ़ेसर डॉ. मुक्ता मिश्रा जी द्वारा बुंदेलखंड के इतिहास में लोक कथाओं के महत्वपूर्ण स्थान के विषय में उदाहरण सहित वर्णन किया गया|
विश्वविद्यालय के संस्कृत अध्ययन एवं शोध केंद्र की विभाग प्रमुख प्रोफ़ेसर डॉ. शीला नायक जी द्वारा आदिकाल से आख्यानों के प्रारंभ एवं विकास पर प्रकाश डाला गया| उन्होंने बताया की आख्यान शब्द का उद्भव वैदिक काल में ऋग्वेद में पाया जाता है| उन्होंने वेदों एवं उपनिषदों में व्याप्त कथाएं उर्वशी एवं पुरुरवा एवं नचिकेता की कथा के बारे में विस्तार से बताया|
विश्विद्यालय के हिंदी अध्ययन एवं शोध केंद्र के प्रोफ़ेसर संतोष रजक जी द्वारा लोक आख्यानों पर आधारित बुन्देली लोकगीतों की परम्परा पर सविस्तार व्याख्यान दिया गया|
प्रोफ़ेसर एन.के.पटेल जी द्वारा बुंदेलखंड के हरबोलों का बुंदेलखंड के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर तथ्य परक प्रस्तुतिकरण किया गया|
इसके साथ ही महोबा, से पधारे लोक कलाकार अमन सोनी एवं उनके दल द्वारा बुंदेलखंड की लोक आख्यान विधा ‘आल्हा गायन’ की शौर्यपूर्ण प्रस्तुति दी गई| उन्होंने ओजपूर्ण समवेत स्वरों में महोबा की लड़ाई का सजीव वर्णन प्रस्तुत किया|
इस अवसर पर स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों सहित लोक कला विषय के छात्रों की उपस्थिति रही|
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