फैमिली पेंशन पर अहम निर्णय, हाईकोर्ट बोला- दूसरी पत्नी का अधिकार नहीं छीना जा सकता

राज्य

चंडीगढ़
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृत सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को पूरी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। यह तब लागू होगा जब वह एकमात्र जीवित और पात्र दावेदार हो। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल दूसरी पत्नी होने के आधार पर विधवा को 50 फीसदी पेंशन तक सीमित करना नियमों की गलत व्याख्या है। जस्टिस नमित कुमार ने गुरदासपुर निवासी एक महिला की याचिका स्वीकार की। उन्होंने 25 मई 2022 के उस आदेश को रद्द किया जिसमें महिला को 50 फीसदी पेंशन का हकदार माना गया था। अदालत ने संबंधित विभाग को महिला को पूर्ण पारिवारिक पेंशन जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही बकाया राशि ब्याज सहित देने का भी आदेश दिया गया।

याचिकाकर्ता के पति पंजाब सरकार में जिला कोषागार अधिकारी थे। उनका निधन 14 नवंबर 2011 को हुआ था। पहली पत्नी का निधन 6 नवंबर 1980 को हो चुका था। याचिकाकर्ता से विवाह 30 मई 1992 को हुआ था।

पेंशन स्वीकृति में त्रुटि 
पति की मृत्यु के बाद महालेखाकार कार्यालय ने 3 अगस्त 2015 को पेंशन भुगतान आदेश जारी किया। इस आदेश में याचिकाकर्ता को केवल 50 फीसदी पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई थी। इसके पीछे तर्क दिया गया कि वह मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी हैं। हाईकोर्ट ने पाया कि कर्मचारी की मृत्यु के समय याचिकाकर्ता ही एकमात्र जीवित पत्नी थीं।

हाईकोर्ट का तर्क
अदालत ने कहा कि एक से अधिक जीवित विधवाओं के बीच पेंशन बंटवारे का नियम यहां लागू नहीं होता। विभाग की गलत व्याख्या से पेंशन का एक हिस्सा बिना लाभार्थी के अटका रह जाता। यह पारिवारिक पेंशन योजना की मूल भावना के विपरीत है। हाईकोर्ट ने दोहराया कि एकमात्र पात्र दावेदार होने पर दूसरी पत्नी को पूर्ण पेंशन मिलेगी। 

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