पटना
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव को बड़ी राहत मिली है। लालू यादव और उनके परिवार को राउज एवेन्यू कोर्ट से एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत मिल गई है। इस मामले में लालू यादव और तेजस्वी यादव की पहले भी पेशी हो चुकी है। लेकिन तेज प्रताप यादव पहली बार पेश हुए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 11 आरोपियों के खिलाफ 2 महीने पहले 6 अगस्त को ही सप्लीमेंट्री चार्जशीट तैयार दायर की थी।
लालू यादव को ED ने बताया है मास्टरमाइंड
ईडी ने जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू यादव को मास्टरमाइंड बताया था। बता दें कि इस मामले में चार आरोपियों की मौत हो चुकी है। अदालत ने लालू यादव, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत दी है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि ईडी ने सभी आरोपियों को बिना गिरफ्तार किए ही आरोपपत्र दाखिल कर दिया, इसलिए अदालत सभी को एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत देती है।
लालू यादव पर आरोप है कि उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए ग्रुप डी पदों पर कई लोगों को नियुक्त किया था। आरोप के अनुसार जिन लोगों की नियुक्ति हुई थी, उन लोगों ने अपनी जमीन लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे संबंधित कंपनी एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर कर दी थी। लालू यादव 2004 से लेकर 2009 तक देश के रेल मंत्री थे। इस समय का ही यह कथित घोटाला है। लालू यादव पर सीधा आरोप है कि उन्होंने रेलवे में लोगों को नौकरी देने के बदले जमीन ली थी।
राबड़ी देवी और मीसा भारती को भी जारी हो चुका है समन
लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनकी बेटी मीसा भारती के खिलाफ 28 फरवरी 2023 को भी समन जारी किया गया था। 10 अक्टूबर 2022 को सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में सीबीआई ने भोला यादव को भी गिरफ्तार किया था, जो लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए उनके ओएसडी हुआ करते थे।
कुछ दिन पहले ही लैंड फॉर जॉब स्कैम में गृह मंत्रालय ने सीबीआई को लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दी थी। वहीं इससे पहले दिल्ली की अदालत ने कहा था कि इस घटना में तेज प्रताप यादव की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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