किसान आंदोलन 2.0 को एक साल पूरा, कल बैठक में क्या क‍िसानों को कोई ‘तोहफा’ म‍िलेगा या फ‍िर ‘धोखा’

राज्य

हरियाणा
किसान आंदोलन 2.0 को आज एक साल पूरा हो गया। बीते साल 13 फरवरी 2024 के दिन किसान दिल्ली कूच के लिए पंजाब से निकले थे, लेकिन उन्हें हरियाणा के बॉर्डर्स पर रोक दिया गया था। तब से किसान अब अंबाला के शंभू बॉर्डर और जींद की खनौरी सीमा पर ट्रैक्टर ट्रालियों के साथ डटे हुए हैं। बुधवार को इसी सिलसिले में पंजाब और हरियाणा के खनौरी बॉर्डर पर किसानों की महापंचायत हुई और अगली रणनीति बनाई गई। अब 14 फरवरी को यानी कल वेलेंटाइन डे के द‍िन सरकार और क‍िसानों के बीच चंडीगढ़ में बातचीत होनी है। देखना यह है क‍ि इस बैठक में क‍िसानों को कोई 'तोहफा' म‍िलेगा या फ‍िर 'धोखा' हाथ लगेगा।

हालांकि बुधवार को महापंचायत शुरू होने से पहले खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा को हार्ट अटैक आ गया था। उनके हाथ पैर ठंडे पड़े तो किसान उन्हें पटियाला के राजिंद्रा अस्पताल ले गए। तकरीबन 20 दिन पहले भी खनौरी बॉर्डर पर उन्हें आंदोलन में ही अटैक आया था। तब अमृतसर के प्राइवेट अस्पताल में उन्होंने स्टंट डलवाया था और अब दोबारा हार्ट अटैक आया है। अब अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

डल्लेवाल के आमरण अनशन से मिली मजबूती
किसान बाॅर्डरों पर डटे रहे और समय-समय केंद्र के खिलाफ संघर्ष के कार्यक्रम करते रहे, लेकिन बाद में ऐसा लगने लगा कि इस आंदोलन 2.0 ने गति खो दी है। इसे देखते हुए आंदोलन में नई जान फूंकने के लिए किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने 26 नवंबर को आमरण अनशन पर बैठने का एलान कर दिया। डल्लेवाल को रोकने के लिए पुलिस ने उन्हें जबरन खनौरी बॉर्डर से एक दिन पहले ही उठा लिया और लुधियाना डीएमसी दाखिल करा दिया। किसानों के विरोध के आगे झुकते हुए पुलिस प्रशासन को डल्लेवाल को वापस खनौरी बाॅर्डर भेजना पड़ा। इसी बीच 101 किसानों के जत्थे के छह दिसंबर को शंभू बाॅर्डर से दिल्ली कूच का एलान हुआ। यह जत्था आगे बढ़ने में असफल रहा। इसके बाद आठ दिसंबर को दोबारा दिल्ली कूच के लिए नया जत्था रवाना हुआ। यह जत्था भी नाकाम रहा। फिर 14 दिसंबर को भी किसान आगे नहीं बढ़ सके, परंतु हर बार काफी गिनती किसान हरियाणा पुलिस के साथ टकराव में घायल होते रहे।

डल्लेवाल की बिगड़ती सेहत का सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
खनौरी बॉर्डर पर आमरण अनशन के कारण कैंसर मरीज किसान नेता डल्लेवाल की बिगड़ती सेहत का सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को डल्लेवाल को मेडिकल सहायता मुहैया कराने के आदेश दिए, लेकिन डल्लेवाल मांगें पूरी होने पर ही अनशन खत्म करने पर अड़े रहे, जिसके चलते केंद्र को झुकना पड़ा। 18 जनवरी को केंद्र के अधिकारी खनौरी बाॅर्डर पहुंचे और 14 फरवरी की बैठक का पत्र किसान नेताओं को सौंपा। अब किसानों की इस बैठक के साथ उम्मीदें लगी हैं।

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