हाथी प्रभावित इलाके में बिजली लाइन विस्तार पर हाईकोर्ट की दखल, सरकार और बिजली कंपनी से मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ रायपुर

बिलासपुर.

रायगढ़ जिले के हाथी प्रभावित धरमजयगढ़ वन क्षेत्र में नियम और मानकों का उल्लंघन कर 33 केवी लाइन विस्तार को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और बिजली कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय
सुनवाई के दौरान राज्य और केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार किया, जबकि निजी कंपनी को नियमानुसार नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। राज्य सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दे दी है। जवाब मिलने के बाद एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को रिजॉइंडर दाखिल करने की अनुमति दी। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि निजी कंपनी की ओर से जवाब पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उस जवाब पर भी प्रत्युत्तर सबमिट करने की छूट दी। जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को तय की गई है।

वन स्वीकृति के बिना किए जाने का दावा
याचिका में बताया है कि धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भालूपखना स्थित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना वन एवं राजस्व भूमि में गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की गईं तथा 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार में भी नियमों की अनदेखी की गई। याचिका में दावा किया गया है कि भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण कार्य के दौरान सीएसपीडीसीएल के नए पोल लगाए गए। आरोप है कि इन्हीं खंभों का उपयोग करते हुए निजी परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन भी ले जाई गई, जिससे अलग से वन भूमि डायवर्सन और वैधानिक अनुमतियों की आवश्यकता से बचा जा सके।

आरोपों के अनुसार, परियोजना प्रबंधन ने पूर्व में ट्रांसमिशन लाइन एवं अन्य संरचनाओं के लिए वन विभाग तथा जिला प्रशासन के समक्ष अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त होने से पहले ही निर्माण कार्य कर लिया गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से 11 केवी लाइन के नवीनीकरण के नाम पर ऐसा ढांचा तैयार किया गया, जिसका लाभ सीधे निजी जल विद्युत परियोजना को मिला। इससे सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग और प्रक्रिया संबंधी पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं।

पूर्व में खारिज हुई थी याचिका
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता ने पहले भी इसी मुद्दे पर याचिका दायर की थी। उस याचिका में सुरक्षा राशि जमा करने से छूट की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने छूट संबंधी आवेदन खारिज करते हुए 7 मई 2026 को याचिका निरस्त कर दी थी। हालांकि अदालत ने नियमों के अनुसार सुरक्षा राशि जमा कर नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता विवेक कुमार पांडेय ने नई जनहित याचिका प्रस्तुत की।

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