साधारण-सी मिट्टी से अत्याधुनिक उपयोग की वस्तुएं बनाने की तकनीक ही सेरामिक इंजीनियरिंग के नाम से जानी जाती है। पुरानी दुनिया के कच्ची मिट्टी के बर्तनों की अगली पीढ़ी के रूप में आए थे सेरामिक वेयर। चिकनी मिट्टी के बर्तनों परग्लेजिंग की परत चढ़ाने से शुरू हुई परंपरा सिलिका और जिरकोनिया जैसी अधातुओं के अत्याधुनिक उपयोग तक आ पहुंची है।
सुबह की चाय की प्याली के साथ शुरू होता है सेरामिक के साथ हमारा सफर। आज सेरामिक वस्तुएं हमारी चाय-कॉफी की प्याली से आगे बढ़कर ऑटोमोबाइल और स्पेस से लेकर मेडिकल इप्लाइंट तक में छा गई हैं। सेरामिक इंजीनियरिंग के तहत औद्योगिक इस्तेमाल के लिए नए-नए सेरामिक मेटीरियल्स का विकास किया जाता है। किचन वेयर, कंक्रीट तथा टाइल्स जैसे ट्रेडिशनल सेरामिक उपयोग अब पुराने पड़ चुके हैं।
सूचना क्रांति के इस दौर में गोल्फ के मैदान से लेकर अंतरिक्ष तक सेरामिक वस्तुओं का उपयोग हो रहा है। फाइबर ऑप्टिस, बायोसेरामिस, तापरोधी टाइल्स और इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक्स आज के दौर में सेरामिक इंडस्ट्री का नया चेहरा हैं। वर्तमान में सेरामिक इंजीनियर का काम उन्नत प्रोसेसिंग तकनीक की सहायता से असाधारण मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, मैग्नेटिक और ऑप्टिकल क्षमताओं से भरपूर मेटीरियल्स डेवलप करना है।
सेरामिक इंजीनियरिंग से संबंधित कोर्स:- साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास करने के बाद इस कोर्स को किया जा सकता है। सेरामिक की पढ़ाई में दिलचस्पी रखने वाले स्टूरडेंट 4 वर्षीय बीटेक यी बीई कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। आईआईटी जैसे प्रसिद्ध संस्थानों में भी एंट्रेंस एग्जाम के मदद से इस कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। इस क्षेत्र में एमटेक की भी डिग्री हासिल की जा सकती है। इसमें डिप्लोमा कोर्स भी चलाए जाते हैं।
कहां मिलेगी नौकरी:- सेरामिक इंजीनियरिंग में कोर्स करने के बाद इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग और सेरामिक पदार्थों का उत्पामदन करने वाली कंपनियों में जॉब मिल सकती है।
क्या बनेंगे आप…
-प्रोजेक्ट सुपरवाइजर
-टेक्निकल कंसल्टेंट
-सेल्स और मार्केटिंग इंजीनयर
-सेरामिक एक्सपर्ट
-सेरामिक शिक्षक
कहां से करें पढ़ाई…
-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सेरामिक्स, कोलकाता
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, राउरकेला
-बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
-गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड सेरामिक टेक्नोलॉजी, कोलकाता
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