न्यूयॉर्क
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान की 'राजनीति से प्रेरित टिप्पणियों' और 'नापाक एजेंडे' को आगे बढ़ाने के उसके प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियाओं पर पाकिस्तान के ''अनुचित आरोपों'' और बच्चों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों तथा सीमापार आतंकवाद से ध्यान हटाने के उसके प्रयासों को दृंढता से खारिज करते हुए भारत ने कहा कि दुनिया अभी पहलगाम हमले को नहीं भूली है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने कहा, ''हम पाकिस्तान द्वारा उसके अपने ही देश में बच्चों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों से ध्यान हटाने के उसके प्रयास को खारिज करते हैं, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट में उजागर किया गया है। साथ ही, पड़ोसी देश द्वारा सीमा पार से किए जा रहे आतंकवाद से भी ध्यान हटाने का प्रयास किया जा रहा है।''
इस मंच का दुरुपयोग कर रहा पाकिस्तान: भारतीय राजदूत
'बच्चे और सशस्त्र संघर्ष' के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान भारतीय राजदूत ने जोरदार जवाब देते हुए पाकिस्तान को इस मंच का दुरुपयोग करने और परिषद के एजेंडे का उल्लंघन करने पर जमकर फटकार लगाई। हरीश ने कहा कि 'बच्चे और सशस्त्र संघर्ष' के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की रिपोर्ट पाकिस्तान में सशस्त्र संघर्ष में बच्चों के खिलाफ गंभीर अत्याचारों का विवरण प्रदान करती है। महासचिव ने ''स्कूलों, विशेष रूप से लड़कियों के स्कूलों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ हमलों सहित इस तरह के गंभीर अत्याचारों में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है। साथ ही, अफगानिस्तान से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों द्वारा सीमा पार गोलाबारी और हवाई हमलों के कारण अफगानी बच्चों की हत्या और उनकी दिव्यांगता पर भी उन्होंने चिंता जताई।
पाकिस्तान पर अपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न चर्चाओं में भारत को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए भारतीय राजदूत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले को याद किया। इसमें पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। हरीश ने कहा, ''दुनिया 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा किए गए क्रूर हमले को नहीं भूली है।'' उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद ने 25 अप्रैल को एक वक्तव्य जारी किया था, जिसमें इस ¨नदनीय कृत्य के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें न्याय के कठघरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
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