‘किसी बाबा के पीछे न भागें’, धीरेंद्र शास्त्री का सनातन धर्म पर जोर

उत्तर प्रदेश राज्य

बरसाना
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री रविवार को प्रिया कुंज आश्रम पर ब्रज के विरक्त संत विनोद बाबा के दर्शन करने पहुंचे। इस दौरान विनोद बाबा ने कहा कि कुछ लोग जाति-पात के नाम पर सनातन धर्म को खत्म करना चाहते हैं। सनातन धर्म हर वर्ग से मिलकर बना है। समझ में नहीं आता कि हम क्यों जाति के नाम पर अपने ही भाइयों का खून बहाते हैं, जबकि अन्य धर्मों में कोई भी जाति के नाम पर बांटा नहीं है। अगर हम सबकी कोई जाति है, तो सिर्फ हिंदू है। जातियां कर्म के आधार पर बनी थी। भगवान ने कोई जाति नहीं बनाई। भगवान सिर्फ मनुष्य बनाए। जाति धर्म के नाम पर हम लोगों ने ही खुद को बांटा है।
 
हिंदू राष्ट्र का निर्माण करना चाहिए- धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि राधारानी मेरी मां है तो कृष्ण मेरे पिता हैं। बरसाना आने की प्रेरणा मुझे राधारानी से ही प्राप्त होती है, लेकिन विनोद बाबा में मुझे साक्षात राधारानी के दर्शन होते हैं। कहा कि जब धर्म के नाम पर पाकिस्तान इस्लामिक देश बन सकता है तो क्या धर्म के नाम पर भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता। इसलिए हम सभी को जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद से परे उठकर हिंदू राष्ट्र का निर्माण करना चाहिए। हमारी बहन बेटियों को लव जिहाद के नाम पर मतांतरण कराया जा रहा है, जिससे सनातन धर्म विलुप्त हो जाए।
 
'सनातन धर्म दुनिया का सबसे प्राचीन अद्भुत धर्म'
इसके साथ ही उन्हों ने कहा कि सबसे बड़े दुर्भाग्य की बात तो यह कि हमारे ही सनातन धर्म के लोग चादर-फादर में अपने देवता को देखते है, जबकि सनातन धर्म दुनिया का सबसे प्राचीन अद्भुत धर्म है। अन्य धर्मों के लोगों ने आज तक अपने भगवान को नहीं देखा सिर्फ भगवान के दूत को ही पूजते हैं। सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता हैं।

मजारों व मौलवी पास क्यों जातें है लोग- बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर
श्रीमद्भागवत गीता में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि मैं ही ब्रह्म हूं, पूरा ब्रह्मांड मुझसे उत्पन्न है। चराचर जगत में मेरी ही सत्ता चलती है। उसके बावजूद सनातन धर्म के सबसे ज्यादा लोग मजारों व मौलवी के यहां अपने दुख-दर्द मिटाने जाते है। यह बात बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने ब्रज के विरक्त संत विनोद बाबा से मुलाकात के दौरान लोगों से कही।

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