उदयपुर
राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल की जिहादियों द्वारा जघन्य हत्या किए जाने के मामले पर बनी फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ नहीं हो सका है। इस मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसने फिल्म की रिलीज पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से गठित पैनल को इस मामले में तेजी से फैसला लेने को कहा है। अदालत ने कहा कि कमेटी को तेजी से निर्णय लेना चाहिए कि आखिर फिल्म पर उसका क्या फैसला है। बेंच ने कहा कि यह फैसला लेना हमारा अधिकार नहीं है कि कौन सी फिल्म रिलीज होनी चाहिए और कौन सी नहीं। यह अधिकार सरकार के पास है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की बेंच ने फिल्म के खिलाफ आपत्तियों पर सुनवाई कर रही केंद्र की समिति से कन्हैया लाल हत्या मामले के आरोपियों का पक्ष भी सुनने को कहा। बेंच ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर पैनल का गठन हुआ है। सरकार पैनल की ओर से फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद आगे बढ़ सकती है। बेंच ने कहा, 'हम इस फैसले को फिलहाल रोकते हैं। हमें देखना होगा कि केंद्र सरकार उच्च न्यायालय में क्या कहती है। यदि सरकार कहती है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है तो फिर देखेंगे। यदि कुछ चीजें काटने की बात कही जाती है तो वह भी देखना होगा। हां, यदि केंद्र सरकार फैसला ही न ले तो अलग मामला है।'
अदालत ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि इस मामले में एक कमेटी का गठन हुआ है और हमें एक से दो दिन इंतजार करना होगा। जजों ने कहा कि इस मामले में गठित कमेटी को तुरंत फैसला लेना चाहिए। बेंच ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि इस मामले में बेंच की ओर से जल्दी ही फैसला लिया जाएगा। इसके साथ ही हम अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय करते हैं।' अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने मूवी के कॉन्टेंट को लेकर कुछ नहीं कहा है। उसने सिर्फ याचियों से इतना कहा है कि वे इस मामले में केंद्र सरकार से संपर्क करें।
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