लखनऊ
उत्तर प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों के बीच लगातार बढ़ रही खटपट अब सरकार के लिए सिरदर्द बन गई है। विधायकों और मंत्रियों की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'मंडलवार संवाद' नामक नई पहल की शुरुआत की है। इस पहल के जरिए जनप्रतिनिधियों और अफसरों को एक मंच पर लाकर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। पिछले कुछ महीनों में कई मंत्री और विधायक अधिकारियों की मनमानी और असहयोग रवैये के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला जैसे कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई है।
दो साल से चल रहा था विवाद, अब सामने आए खुलकर आरोप
सूत्रों के अनुसार, पिछले दो वर्षों से विधायकों और अधिकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी। अब, 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए ये विवाद सतह पर आ गया है। भाजपा के एक विधायक का कहना है, “हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं, लेकिन अधिकारी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं।”
अधिकारियों की सफाई: जनप्रतिनिधि डालते हैं अनुचित दबाव
दूसरी ओर, सचिवालय कर्मचारी संघ के सदस्य और कई अधिकारी यह कहते नजर आ रहे हैं कि जनप्रतिनिधि अक्सर नियमों से परे जाकर दबाव बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने पहले ही अधिकारियों से कहा था कि वे बेवजह के दबाव में आए बिना काम करें।
CM ने दी कड़ी हिदायतें, डीएम-एसडीएम के हुए तबादले
सीएम योगी ने मंत्रियों और विधायकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जिलों में अफसरों के तबादले किए हैं। मंत्री प्रतिभा शुक्ला के अनुसार, “योगी जी ने हमारी बात सुनी और संबंधित अफसरों को बदला गया। उम्मीद है अब चीजें सुधरेंगी।”
अधिकारियों ने फोन उठाना हंद कर दिया…ऊर्जा मंत्री खुलेआम जता चुके हैं नाराजगी
गौरतलब है कि हाल ही में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने अपने कार्यालय के एक्स अकाउंट पर लिखा था- 'अधिकारियों ने फोन उठाना पूरी तरह से बंद कर दिया है। स्थिति पहले से ही खराब थी, और अब यह और भी बदतर हो गई है।' शर्मा ने अपनी बात रखने के लिए बिजली उपभोक्ता और विभाग के एक अधिकारी के बीच बातचीत का एक ऑडियो क्लिप अपलोड किया।
मंत्री गोपाल गुप्ता नंदी ने CM योगी को लिखी थी चिट्ठी
वहीं बुनियादी ढांचा और उद्योग मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र वायरल हो गया था। इसमें उन्होंने अपने विभाग के अधिकारियों पर दो वर्षों से अधिक समय से निर्देशों का पालन नहीं करने के साथ-साथ मनमाने ढंग से काम करने और कुछ के प्रति तरजीही व्यवहार दिखाने का आरोप लगाया था।
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