कटनी
कटनी में पांच साल से बन रहे एशिया के सबसे बड़े रेल ग्रेड सेपरेटर की डाउन लाइन का काम पूरा हो गया है. कटनी जिले में बिलासपुर और सिंगरौली रेल खंड से दमोह-सागर रूट पर 33.4 किमी लंबे अप और डाउन ग्रेड सेपरेटर का निर्माण किया जा रहा है. डाउन लाइन की 17.52 किमी लंबी रेल लाइन, सिग्नल और अन्य तकनीकी कार्यों की जांच के बाद रेल सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की मौजूदगी में स्पीड ट्रायल सफल रहा.
झलवारा से मझगवां और कटंगी तक दो इंजनों और 11 बोगियों वाली यात्री ट्रेन उड़ते जंक्शन कहे जाने वाले ग्रेड सेपरेटर पर 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी. रेल सुरक्षा आयुक्त मनोज अरोड़ा दो दिवसीय दौरे पर कटनी पहुंचे. उन्होंने एनकेजे-कटंगी, झलवारा से मझगवां रेलवे स्टेशन तक बन रहे डाउन ग्रेड सेपरेटर रेल ब्रिज का मोटर ट्रॉली से गहन निरीक्षण किया.
पश्चिम मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक कमल कुमार तलरेजा सहित अन्य अधिकारियों ने भी ट्रैक का निरीक्षण किया. पहले दिन सीआरएस ने रेल लाइन, पॉइंट की हाउसिंग, टंग रेल, ब्रिज के लेआउट गर्डर, स्पैन, बेयरिंग, प्लेट, चैनल स्लीपर, बैलास्ट, ग्लूड जॉइंट, ट्रॉली घर, कुशन, इम्प्रूव्ड SEJ, OHE लाइन, चेयरप्लेट, कर्व (गोलाई), लेवल क्रॉसिंग और पॉइंट का गहन परीक्षण किया.
दूसरे दिन झलवारा से मझगवां और कटंगी तक दो इंजनों और 11 बोगियों वाली ट्रेन डाउन ट्रैक पर 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाई गई.
जानकारी के मुताबिक, कटनी ग्रेड सेपरेटर की लागत 1800 करोड़ रुपये है. अप और डाउन मिलाकर 33.4 किमी लंबा यह ग्रेड सेपरेटर 676 पिलरों पर बनाया गया है, जिसमें अप साइड 15.85 किमी और डाउन साइड 17.52 किमी लंबी लाइन बिछाई गई है.
कटनी में बन रहे ग्रेड सेपरेटर की डाउन लाइन का काम पूरा.
स्पीड ट्रायल की सफलता के बाद अब गुड्स ट्रेन का परिचालन जल्द शुरू हो सकता है, जिससे कटनी स्टेशनों पर रेल ट्रैफिक में काफी राहत मिलेगी.
676 पिलर्स पर बिछाई गई है रेल लाइन.
यह ग्रेड सेपरेटर भारत का सबसे लंबा रेलवे ब्रिज बनने जा रहा है, जो संरचनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ रेलवे संचालन में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा.
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