भारत का नया व्यापार प्लान: ट्रंप टैरिफ के बावजूद चीन के साथ संबंध सुधार सकते हैं

देश

नई दिल्ली
ट्रंप के टैरिफ की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्तों में कड़वाहट पैदा हो चुकी है। वहीं, दूसरी ओर भारत और चीन के बीच रिश्तों में फिर से गरमाहट बढ़ रही है। अमेरिकी द्वारा टैरिफ लागू किए जाने के बाद भारत और चीन के बीच आयात और निर्यात दोनों में वृद्धि हुई है।

दूसरी ओर भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने की दिशा में द्विपक्षीय बातचीत शुरू हो गई है। पांच सालों से बंद यह व्यापार अब फिर से बहाल हो सकता है, जो दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि बीजिंग इस मुद्दे पर भारत के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने को तैयार है। मंत्रालय ने आगे कहा कि सीमा व्यापार ने वर्षों से दोनों देशों के सीमा क्षेत्रों के निवासियों के जीवन में सुधार लाने में अहम भूमिका निभाई है।

भारत-चीन के बीच सुधर रहे रिश्ते
एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से लेकर 1 सितंबर तक चीन का दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, सीमा स्थिरता और क्षेत्रीय कूटनीति पर चर्चा होने की संभावना है।

बता दें कि चीन ने भारत को यूरिया की आपूर्ति पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी है। वहीं, भारत ने चीनी नागरिकों को पर्यटक वीजा जारी करना फिर से शुरू कर दिया है, और तकनीकी क्षेत्र सहित 10-15 चीनी निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई है। इसके अलावा भारत सरकार ने जानकारी दी है कि अगले महीने से भारत और चीन के बीच सीधी फ्लाइट भी चलेगी। पीएम मोदी के इस दौरे से दुनिया ये संदेश जाएगा कि भले ही भारत-चीन के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद हो लेकिन वह अपने हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेता है।

चीन के साथ व्यापार घाटा कम करने का सुनहरा मौका
कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि  भारत को चीन के साथ सीधी और साफ बातचीत करनी चाहिए, ताकि अच्छे व्यापारिक सौदे तय किए जा सकें।  इससे न सिर्फ भारत-चीन रिश्तों में सुधार होगा, बल्कि अमेरिका के साथ बातचीत में भी भारत की स्थिति मजबूत बनेगी। सबसे बड़ी चिंता है कि भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बहुत बड़ा है. 2010 में भारत ने चीन को 17.44 अरब डॉलर का सामान बेचा था, जो 2024 में घटकर 14.90 अरब डॉलर रह गया।  चीन ने भारत को 2010 में 41.25 अरब डॉलर का सामान बेचा था, जो 2024 में बढ़कर 126.96 अरब डॉलर हो गया।

 

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