भोपाल
सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश में खूंखार आवारा डॉग्स को पकड़कर शेल्टर होम में रखने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन भोपाल में अब तक ऐसा कोई शेल्टर होम नहीं है। लिहाजा इस स्थिति में निगम प्रशासन आवारा डॉग्स को पकड़कर शेल्टर होम में रखने में असमर्थ नजर आ रहा है। हालांकि, अधिकारी कह रहे हैं कि शेल्टर होम बनाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है, लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि पिछले साल बनी शेल्टर होम बनाने की फाइल निगम कार्यालय से गायब है। सूत्रों की मानें तो पिछले साल ही शेल्टर होम बनाने की एक योजना बनाई गई थी, फाइल भी बनाई गई, लेकिन फंड की वजह से योजना पर अमल नहीं हुआ। चूंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश हुए हैं ऐसे में निगम की वेटरनरी शाखा में हड़कंप मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद इस योजना की फाइल ढूंढी जा रही है, पिछले कुछ दिन से कर्मचारी फाइल को ढूंढ रहे, लेकिन अब तक फाइल किसी को नहीं मिली।
छह साल पहले शाहजहांनाबाद में देखी गई थी जमीन
जानकारी के अनुसार जब यह योजना बनाई गई थी, तब एसके श्रीवास्तव वेटरनरी शाखा में ऑफिसर थे। उनके रिटायर होने के बाद यह जानकारी किसी के पास नहीं है कि फाइल कहां रखी है। हालांकि, छह साल पहले भी शहर में शेल्टर होम बनाने की योजना बनी थी और शाहजहांनाबाद में जमीन भी देखी गई थी, लेकिन वह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया। यह स्थिति केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। प्रदेश के 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका परिषद और 298 नगर परिषद में से किसी के पास भी शेल्टर होम नहीं है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि खूंखार डॉग्स को आबादी से दूर सुरक्षित स्थान पर रखा जाए।
बेघर कुत्तों के समर्थन में प्रदर्शन
दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर भेजने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में गुरुवार को शाहपुरा पार्क में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ। शहरभर से आए पशुप्रेमी, सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सामुदायिक कुत्तों को हटाने के बजाय नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण और भोजन स्थलों का निर्धारण जैसे मानवीय और वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाएं। उनका तर्क था कि आठ हफ्तों में तीन लाख कुत्तों को शेल्टर भेजना अव्यवहारिक है इससे रेबीज नियंत्रण व पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। पशुप्रेमी अविनाश शिनाये ने कहा कि यह कदम इंसान और जानवर के लिए नुकसानदायक होगा।
स्वाति और अभिषेक ने भी कुत्तों को मोहल्ले का हिस्सा बताते हुए उन्हें हटाने का विरोध किया। दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी आदेश को अव्यवहारिक बताते हुए कहा है कि यह एक ‘सुओ मोटू’ केस पर आधारित है, जिसमें किसी ने शिकायत भी नहीं की थी।
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