शिवपुरी
मध्य प्रदेश में एक तरफ जहां कुपोषण से निपटने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। इन दावों के बीच शिवपुरी में इससे ग्रसित 1 साल 3 महीने की बच्ची की मौत हो गई। शर्मनाक बात यह है कि परिजनों ने उसका इलाज सिर्फ इसलिए नहीं कराया क्योंकि उन्हें लड़का चाहिए था।
नहीं थम रहे मां के आंसू
दरअसल, दिव्यांशी धाकड़ को कुपोषण की वजह से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उसने दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत के बाद रोती बिलखती उसकी मां के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।
सास नहीं चाहती थी कि उसका इलाज कराया जाए
बच्ची की मां खुशबू धाकड़ बिहार की है जिसकी शादी शिवपुरी के कांदी की रहने वाले लाखन से हुई थी। उसने बताया कि ‘बच्ची को दस्त हो गया था और कमजोरी हो गई थी। मेरी सास नहीं चाहती थी कि उसका इलाज कराया जाए। घर से कोई नहीं आया।’
गौर करने वाली बात यह है कि एक तरफ जहां कुपोषण से निजात पाने के तमाम तरह के दावे किए जाते हैं। वहीं स्वास्थ्य महकमे के कागजी दावे जमीनी हकीकत से आज भी दूर है। शहर सहित अंचल में बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। इधर स्वास्थ्य विभाग से लेकर महिला बाल विकास करोड़ों रुपए कुपोषण के कलंक को मिटाने के नाम पर हर माह खर्च करता है। लेकिन जब ऐसी तस्वीरें सामने आती है तो सभी दावों की पोल खुल जाती है।
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