पटना
बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने कुछ लोग कागज सौंपने के लिए आपाधापी करने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें आगे जाने से रोका तो हंगामा करने लगे। यह देखकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच पर ही आगे आ गए और उनसे हंगामे की वजह पूछी। हंगामा मुस्लिम समुदाय के शिक्षक अभ्यर्थियों ने किया था। उनका कहना था कि आज 1659 मदरसों की घोषणा होनी थी। यही बोलकर उन्हें कार्यक्रम में लाया गया था, लेकिन कार्यक्रम के दौरान वहां ऐसी घोषणा नहीं की गई। इसी वजह से मुस्लिम शिक्षक अभ्यर्थी नाराज होकर हंगामा करने लगे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित बापू सभागार में बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना के शताब्दी समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बहुत खुशी की बात है कि बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड का सौ वर्ष पूरा हो चुका है, जिसका आज शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। इस समारोह में मदरसा से जुड़े 15 हजार से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले बहुत बुरा हाल था। पूर्व की सरकार ने कुछ काम नहीं किया। 24 नवंबर, 2005 को एन०डी०ए० की सरकार बनी तब से हमलोग बिहार के विकास में लगे हुये है और राज्य में कानून का राज है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वर्ष 2005 से पहले मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए कोई काम नहीं किया गया था। नई सरकार के गठन के बाद से मुस्लिम समुदाय के लिए काफी काम किया है। पहले हिन्दू-मुस्लिम झगड़ा होता था, इसलिए वर्ष 2006 से ही कब्रिस्तान की घेराबंदी शुरू की गयी है। बड़े पैमाने पर कब्रिस्तानों की घेराबंदी की जा चुकी है। अब कोई झगड़ा-झंझट नहीं होता है। पहले मदरसों की स्थिति काफी खराब थी, मदरसा शिक्षकों को बहुत कम पैसा मिलता था। वर्ष 2006 से मदरसों का निबंधन किया गया तथा उन्हें सरकारी मान्यता दी गयी है। मदरसा के शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के बराबर वेतन देना शुरू किया और तब से लगातार समान वेतन दिया जा रहा है।
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