दिव्यांग कोटे में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने कसा शिकंजा

राज्य

जयपुर

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में लगातार उजागर हो रही धांधलियों और गड़बड़ियों के बीच राज्य सरकार अब दिव्यांग कोटे से नियुक्त कर्मचारियों की जांच के लिए एक्टिव मोड में आ गई है। सरकार ने सभी विभागों में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों के दस्तावेज और मेडिकल सर्टिफिकेट की दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया है। यह जांच अधिकृत मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में बने मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाएगी।

कार्मिक विभाग के शासन सचिव कृष्णकांत पाठक के अनुसार पहले चरण में पिछले पांच वर्षों में दिव्यांग कोटे से चयनित सभी कर्मचारियों की जांच होगी। इसके बाद पूरे प्रदेश में कार्यरत अन्य दिव्यांग कर्मचारियों की भी मेडिकल जांच और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।

अगर जांच में किसी भी कर्मचारी के दिव्यांगता प्रमाण पत्र या दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्मिक विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा। इतना ही नहीं संदिग्ध मामलों में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को भी शिकायत दी जाएगी।

इस कदम की पृष्ठभूमि में हाल ही में उजागर हुए पेपर लीक घोटाले और उसके दौरान सामने आए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र हैं। एसओजी की जांच में सामने आया कि कई अभ्यर्थियों ने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरियां हासिल कीं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में गठित विशेष मेडिकल बोर्ड ने जांच में पाया कि 29 कर्मचारियों में से 24 ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। इनमें टीचर, एएनएम, स्टेनोग्राफर समेत विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल थे।

सरकार के इस फैसले से साफ है कि अब फर्जीवाड़े के जरिए नौकरी करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी है, जिससे भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सके।

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