भोपाल
किसानों द्वारा अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अनियंत्रित रासायनिक खाद के उपयोग के प्रमाण सामने आ रहे हैं। इससे मृदा (मिट्टी) को होने वाले नुकसान को देखते हुए भारत सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना वर्ष 2015 में लागू की। अब तक मध्य प्रदेश में 14 लाख कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसमें खेत के चारों ओर से मिट्टी लेकर यह परीक्षण किया जाता है कि उसमें किस तत्व की कमी है। उसकी पूर्ति के लिए सलाह दी जाती है।
इसी संदर्भ में खाद के उपयोग के आंकड़ों को देखें तो योजना अपने उद्देश्य में सफल होती नजर नहीं आती है। सरकार ने इसकी निगरानी की भी कोई व्यवस्था नहीं की है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि किसान सलाह का पालन कर रहा है या नहीं। इसका एक पक्ष यह भी है कि किसान मृदा परीक्षण को लेकर जागरूक नहीं हैं। वे स्व प्रेरणा से मिट्टी परीक्षण नहीं कराते हैं। अधिकारी भी उदासीन हैं।
एमपी में 11 जलवायु क्षेत्र
मध्य प्रदेश में 11 जलवायु क्षेत्र हैं। भारतीय भूमि एवं मृदा सर्वेक्षण विभाग ने प्रदेश को पांच मिट्टी (काली, लाल-पीली, जलोढ़, लेटराइट और मिश्रित) के प्रकारों में बांटा है। किसी में कैल्शियम, मैग्नीशियम, एल्यूमीनियम, लोहा, पोटेशियम भरपूर है तो किसी में लोहा, एल्युमिनियम और चूने की प्रचुरता है। इसी तरह कई तत्वों की कमियां भी हैं, जो उत्पादकता प्रभावित करते हैं।
पूर्व कृषि संचालक और मृदा विज्ञानी डा.जीएस कौशल का कहना है कि जब तक किसान को यह पता न हो कि उसकी भूमि में किस तत्व की कमी है या अधिक है तो वह संतुलित खाद का उपयोग कैसे करेगा। अधिकतर किसान परंपरा के अनुसार खाद का उपयोग करते हैं, जो अनुचित है। इससे केवल लागत बढ़ती है उत्पादकता नहीं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन यह व्यवस्था कारगर नहीं है क्योंकि किसान अनुशंसा के अनुसार खाद का उपयोग ही नहीं करते हैं। वे आसानी से इसका पालन कर भी नहीं सकते हैं क्योंकि 30 लाख से अधिक किसान तो खाद के लिए तो सहकारी समितियों के भरोसे हैं। किसान निजी विक्रेताओं से महंगी और अमानक खाद खरीद भी नहीं सकते।
छह वर्ष तक प्रयोगशालाओं का संचालन ही प्रारंभ नहीं हुआ
कृषि विज्ञानियों का कहना है कि मृदा परीक्षण के लिए पहले तो प्रयोगशालाएं गिनती की थीं। जब विकासखंड स्तर पर इन्हें स्थापित करने के लिए 150 करोड़ रुपये व्यय किए गए लेकिन करीब छह वर्ष तक अमले की कमी के कारण संचालन ही प्रारंभ नहीं हो पाया। सरकार ने जून, 2024 में इन्हें संचालन के लिए युवा उद्यमियों और संस्थाओं को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।
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