रूसी तेल साम्राज्य पर संकट! पुतिन की विदेश संपत्तियों की जबरन बिक्री ने बढ़ाई चिंता

दुनिया

वाशिंगटन 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच तनाव की कीमत एक प्रमुख रूसी तेल कंपनी चुका रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में रूस की तेल कंपनियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, और उनका वैश्विक साम्राज्य धीरे-धीरे ढहने लगा है। रूस की दूसरी सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी लुकोइल ने घोषणा की है कि वह अपनी विदेशी संपत्तियों को बेच देगी।

लुकोइल ने बताया कि यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में अमेरिका द्वारा पिछले सप्ताह लगाए गए प्रतिबंधों के बाद वह अपनी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों का निपटान करेगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि ये प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए हैं, जिनका मकसद रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध रोकने के लिए मजबूर करना है। एक आधिकारिक बयान में लुकोइल ने कहा कि वह संभावित खरीदारों के साथ चर्चा में जुटी हुई है। ये सौदे प्रतिबंधों में दी गई छूट की अवधि के अंतर्गत पूरे होंगे, जिसमें 21 नवंबर तक लेन-देन की अनुमति है। कंपनी ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर इस समयसीमा को बढ़ाया जा सकता है। बता दें कि लुकोइल के पास 11 देशों में तेल-गैस परियोजनाओं में हिस्सेदारी है, जिसमें बुल्गारिया और रोमानिया में रिफाइनरियां तथा नीदरलैंड्स की एक रिफाइनरी में 45 प्रतिशत का शेयर शामिल है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने 22 अक्टूबर को रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों ( लुकोइल और रोसनेफ्ट) पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की थी। ये कंपनियां रूस के तेल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा संभालती हैं। तेल-गैस क्षेत्र से होने वाली कमाई रूस की सरकार के राजस्व का मुख्य स्तंभ है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रूस से यूक्रेन में तत्काल युद्धविराम पर सहमति जताने की अपील की है।

बता दें कि इन प्रतिबंधों से लुकोइल और रोसनेफ्ट के लिए विदेशों में व्यापार करना लगभग असंभव हो गया है। अमेरिकी कंपनियों को इनसे लेन-देन करने से रोकने के अलावा, इन प्रतिबंधों का असर उन विदेशी बैंकों पर भी पड़ सकता है जो इन कंपनियों के साथ कारोबार करते हैं, क्योंकि उन्हें भी पाबंदियां झेलनी पड़ सकती हैं।

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